Friday, 5 February 2016

पंचायतों में 50 फीसदी आरक्षण महिलाओं को क्यू?

संसद में 33 फीसदी आरक्षण का लाभ न देकर सरकार पंचायतों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण का लाभ देने की तैयारी में है। लेकिन जब महिलाओं को पंचायत में पहले से ही आरक्षण प्राप्त है। ऐसे में उन्हें 50 फीसदी की लाभ देने से बेहतर होता कि उन्हें संसद में 33 फीसदी आरक्षण का लाभ दिया जाता। जिसकी मांग महिलाएं पिछले 18 साल से कर रही है। लेकिन शायद देश की पुरुषवादी सरकारें मान बैठी हैं कि पुरुषों की दासी कही जाने वाली महिलाओ को संसद में बैठकर कानून बनाने का अधिकार कैसे दिया जा सकता है?
 ये मैं नहीं कह रहा ये जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय महासचिव शरद यादव के विचार थे। लेकिन इन बेचारी दासियों की मासूमियत देखिए कि इन्होने इन्ही की पार्टी को बिहार चुनाव में वोट देकर चुनाव जीताया। वैसे ऐसे विचार रखने वाले नेताओं में अकेले शरद यादव ही नहीं है। सपा के मुखिया तो अक्सर महिलाओं के खिलाफ बयान देते रहते है। इतना ही नहीं सभी पार्टियों में ऐसे नेता मौजूद हैं, जो संसद में महिलाओं के आरक्षण का विरोध करते हैं।
हमारे देश के पीएम मोदी के मुताबिक तो भारत अकेला ऐसा देश है जहां महिलाओं को देश भगवान का दर्जा दिया जाता है। लेकिन पीएम को ये नही पता है कि शायद भारत अकेला ऐसा देश होगा जहां की संसद में महिलाओं की इतनी कम संख्या है। हमसे पिछड़े देश और हमारे पड़ोसी पाकिस्तान में भी महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण प्राप्त है, जिसकी वजह से पाकिस्तान की संसद में महिलाओं की काफी संख्या संसद में मौजूद है। लेकिन शायद हमारे देश में महिलाओं को मौजूदा समय में भी घर की चहरदिवारियों तक ही सीमित रखने की कोशिश की जा रही है।
 पहली बार लोकसभा में महिला आरक्षण बिल 12 सितंबर 1996 में एचडी देवगौड़ा के प्रधानमंत्री रहते पेश किया गया। सन 1997 में भी बिल पर चर्चा हुई लेकिन बिल पास नहीं हो सका। इसके बाद 6 मई 2008 को कांग्रेस के संसदीय कार्य मंत्री एच. आर भारद्वाज ने जब बिल को राज्य सभा में पेश करना चाहा विपक्ष के विरोध के आगे बिल पेश न हो सका। अटल विहारी वाजपेयी ने 1998 में बिल को दोबारा पेश करने की कोशिश की। लेकिन इस बार भी बिल पास नही हुआ। 1999 में 13 वीं लोकसभा के दौरान भी एनडीए द्वारा बिल पास कराने का प्रयास भी असफल रहा। हालांकि 2009 और 2010 मे भी बिल पास कराने की कोशिश की गयी। लेकिन विरोधियों ने इसे पास नहीं होने दिया।