Monday, 13 July 2015

मेरी हमेशा से कुछ आशाएं रही हैं


मेरी हमेशा से कुछ आशाएं रही हैं उन लोगों से जो मेरे साथ जुड़े होते हैं | मैं जितना भी लोगों के साथ करता हूँ मेरी तमन्ना होती है की बदले में मुझे उससे थोडा ज्यादा मिले , और शायद ये मेरी सोच ही नही बल्कि हर इंसान की सोच होती है या सही शब्दों में कहू तो ये इंसानी प्रवृत्ति है | हर इंसान के अपने कुछ शौक और सपने होते हैं कुछ अच्छे तो शायद कुछ ऐसे जो लोगों को रास न आयें पर कहीं न कही हर इंसान अपने करीबी लोगों से उन चीज़ों में कम-से-कम सराहना की उम्मीद तो करता ही है | क्या ये हो पाता है ??

अगर कोई लेखक है तो जरुरी नही की वो प्रेमचंद हो ,अगर कोई स्केच आर्टिस्ट है तो जरुरी नहीं वो ऍम ऍफ़ हुसैन हो , अगर कोई कीबोर्ड अच्छा बजता है तो जरुरी नहीं वो ऐ आर रहमान हो या अगर कोई पढने में अच्छा है तो जरुरी नही कि वो किसी आई आई ऍम या आई आई टी का ही छात्र हो | हर इंसान का अपना एक हुनर होता है जिसमे अगर वो निपुण न भी हो तो कम-से-कम बेहतर होता है | हिंदी जगत में एक कहावत है की “जितना है उतने में ही संतोष करो” ,पर क्या ये आजकल मुमकिन हो पाता है?

जब भी हम किसी को दोस्त बनाते हैं तो ऐसा नहीं की कोई टर्म्स एंड कंडीशंस के साथ बनाते है ये तो स्वाभाविक है की जब हम किसी व्यक्ति के विचारों में थोडा अपना-पन पातें हैं तो हम उसकी तरफ आकर्षित हो उठते हैं | हमारी अपने दोस्तों और उन ख़ास लोगों से बहुत सारी उम्मीदें होती हैं जिनसे हम प्यार करते हैं जब ये सारी उम्मीदें पूरी होती है या इनमें से अगर कुछ भी पूरी होती है तो हमारा रिश्ता और गहरा हो जाता है पर कई बार इन उम्मीदों के कारण ही रिश्तों में खटास आ जाती है |

अगर इस वक़्त में आपसे पूछने लगूं की आपको कैसा हमसफ़र या दोस्त चाहिए तो आपकी भी लम्बी लिस्ट तैयार हो जाएगी | लेकिन क्या वाकई में ये मुमकिन है की आपको कोई ऐसा इंसान मिले जो आपकी हर उम्मीद पर खरा उतरता हो ? …. नही ये मुमकिन नहीं है क्योंकि आपकी ये उम्मीदें भी समय के साथ घटती और बढती हैं आपकी ये उम्मीदें भी परिस्थिति के अनुरूप अपने-आप को ढालती हैं | हर अगली परिस्थिति में आपकी इच्छा कुछ अलग होती है लेकिन ये संभव नही की जैसा आप सोचते हैं वैसा ही हर इंसान सोचता हो |


अंग्रेजी में एक कहावत है कि ” नो वन इज परफेक्ट “, और में इससे सहमत हूँ क्योंकि अगर कोई परफेक्ट होता तो वो इंसान न कहलाता | हमें कई बार ऐसे लोगों का साथ कुछ ऐसी परिस्थितियों में मिलता है की जब हमें ऐसे लोगों की खासा जरुरत रहती है लेकिन हर बार ऐसा हो ये मुमकिन नहीं है | इंसान गलतियों का पुतला है कई बार गलतियाँ अनजाने में होती है तो कई बार जानबूझकर लेकिन अपनों से मु मोड़ लेना किसी भी समस्या का हल नहीं होता | मुझे नहीं पता कि कोई ऐसा होता है या नहीं जैसा हम चाहते हैं हाँ मगर हमें अपने लिए बेहतर चुनना चाहिए क्योंकि कभी कभी इन बेहतर लोगों में ही हमें कोई अपना मिल जाता है|