Wednesday, 8 July 2015

व्यापम घोटाले का सच,आखिर क्यू हो रही रहस्य मय मौते

दिल्ली के पत्रकार अक्षय सिंह और जबलपुर में मेडिकल कॉलेज के डीन अरुण शर्मा की हालिया 'संदिग्ध मौत' के बाद विपक्षी कांग्रेस मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार पर लगातार सवालिया निशान लगा रही है।
मध्य प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले से जुड़े हर वर्ग के लोगों की मौत हो रही है। लेकिन इन मौतों के रहस्य से पर्दा उठना अभी बाकी है, और जांच जारी है।


मौतों की सूची पर नजर डालें तो पता चलता है कि परीक्षा देने वाला मर रहा है, फर्जी परीक्षार्थी मर रहा है, परिजन मर रहे हैं और जांच में सहयोग करने वाले मौत के मुंह में समा रहे हैं। वे लोग भी अब अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, जो इस मामले की जांच से जुड़े हुए हैं।

राज्य का व्यापमं घोटाला आज देश में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। पिछले शनिवार से इस मामले में हर रोज लगातार मौतें हुई हैं।

दिल्ली के एक समाचार चैनल के पत्रकार मध्य प्रदेश के झाबुआ में इस घोटाले से संबंधित समाचार कवर करने गए थे और समाचार संकलन के दौरान ही शनिवार को उनकी मौत हो गई। वहीं पुलिस जांच में मदद कर रहे मध्य प्रदेश के एक मेडिकल कॉलेज के डीन अरुण शर्मा रविवार को दिल्ली के एक होटल में मृत पाए गए।

और सोमवार को व्यापमं परीक्षा के जरिए चयनित एक प्रशिक्षु महिला उप निरीक्षक (सब इंस्पेक्टर) ने राज्य के सागर जिले में तड़के तालाब में कूदकर खुदकुशी कर ली। प्रशिक्षु उप निरीक्षक की पहचान अनामिका कुशवाहा के रूप में हुई है। वह जिले के जवाहर लाल नेहरू पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षणरत थीं।
जुलाई 2013 में मामला दर्ज होने के बाद लगातार मौतें हो रही हैं। कांग्रेस मौतों का आंकड़ा 48 बता रही है, तो उच्च न्यायालय के निर्देश पर जांच की निगरानी कर रही एसआईटी को 33 मौतों की जानकारी है। वहीं सरकार मौतों की संख्या 25 मानती है।


व्यापमं से जुड़े जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें विद्यार्थी, दलाल, फर्जी विद्यार्थी के तौर पर परीक्षा देने वाले और आरोपियों से जुड़े उनके परिजन शामिल हैं। जेल में और जेल के बाहर मौतें हुई हैं।

इंदौर में नरेंद्र सिंह तोमर की तबीयत बिगड़ी और अस्पताल पहुंचने पर मौत हो गई। इसी तरह श्योपुर के अमित सगर भी व्यापमं का आरोपी था और घर से घूमने निकला था और उसका शव नहर में मिला था। एसटीएफ और पुलिस इसे आत्महत्या करार दे रही है। एक अन्य आरोपी राज्यपाल रामनरेश यादव के बेटे शैलेश यादव की भी संदिग्ध हालात में लखनऊ में मौत हुई थी।

एक ओर मौतों का सिलसिला जारी है तो दूसरी ओर इस मामले से जुड़े लोग और मामले को उजागर करने वाले अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

व्यापमं घोटाले का सबसे बड़ा पहलू चिकित्सा महाविद्यालयों में दाखिले से जुड़ा है। ग्वालियर के गजराजा चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. जी. एस. पटेल ने भी लगभग छह माह पूर्व सुरक्षा की बात भोपाल में अफसरों के साथ हुई बैठक में उठाई थी।

पटेल ने सोमवार को आईएएनएस से कहा, “उनके कॉलेज से छात्रों का निष्कासन चल रहा था, और उस समय दफ्तर के बाहर भीड़ लगी रहती थी। इस पर सुरक्षा की बात कही थी। वर्तमान में सुरक्षा की कोई बात नहीं की है। लेकिन सतर्क व सजग जरूर हैं।”

उच्च न्यायालय के निर्देश पर पूर्व न्यायाधीश चंद्रेश भूषण की अध्यक्षता में एसआईटी की देखरेख में एसटीएफ जांच कर रहा है। एसटीएफ के दो अफसरों ने भी एसआईटी से अपनी जान को खतरा बताया है।

चंद्रेश भूषण ने सोमवार को संवाददाताओं से चर्चा के दौरान माना कि दो अफसरों ने अपनी जान को खतरा बताया है।
इसी तरह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की जबलपुर इकाई के अध्यक्ष डॉ. सुधीर तिवारी ने भी सुरक्षा की मांग की है। डॉ. तिवारी ने पिछले दिन तत्कालीन डीन डॉ. डी.के. साकल्ले की मौत को लेकर सवाल उठाए थे। डॉ. साकल्ले की चार जुलाई, 2014 को घर में जलकर मौत हो गई थी, उसे आत्महत्या बताया गया था।

कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव ने मौतों पर सवाल उठाए हैं। साथ ही सुनियोजित साजिश की आशंका जताई है। उन्होंने व्यापमं घोटाले की सीबीआई से जांच की मांग की है। इस मामले से जुड़े लोग अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री चौहान ने सुरक्षा का भरोसा दिलाया है।

ज्ञात हो कि राज्य में इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज में दाखिले से लेकर विभिन्न विभागों की भर्तियों की परीक्षा व्यापमं आयोजित करता है। इन दाखिलों और भर्तियों में हुई गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद जुलाई 2013 में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इस मामले में पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा से लेकर व्यापमं के पूर्व नियंत्रक पंकज त्रिवेदी सहित वरिष्ठ अधिकारी व राजनीतिक दलों से जुड़े लोग जेल में है। राज्यपाल रामनरेश यादव पर भी सिफारिश करने का प्रकरण दर्ज है।