Wednesday, 24 December 2014

भारत रत्न...

पंडित मदन मोहन मालवीय....जैसा नाम वैसा काम....अपने काम और व्यवहार से पंडित मदन मोहन सबका मन मोह लेते थे। यही वजह है कि उन्हें महामना की उपाधि से नवाजा गया। ये उपाधि पाने वाले वे पहले और अंतिम भारतीय हैं। इसी वजह से लोग उन्हें महामना कह कर पुकारते थे। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसंबर 1861 को इलाहाबाद में हुआ। मदन मोहन के पिता पंडित ब्रजनाथ संस्कृत भाषा के प्रकाण्ड विद्वान थे। मात्र 5 साल की आयु में उनके माता-पिता ने उन्हें संस्कृत भाषा में प्रारंभिक शिक्षा दिलवाने के लिए पंडित हरदेव धर्म ज्ञानोपदेश पाठशाला में भर्ती किया। महामना ने वहां से प्राइमरी परीक्षा पास की। विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों से होते हुए उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से बी.ए. की उपाधि हासिल की। पंडित मदन मोहन मालवीय ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेकर 35 साल तक कांग्रेस की सेवा की। उन्हें सन्‌ 1909, 1918, 1930 और 1932 में कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। मालवीय जी एक प्रख्यात वकील भी थे। एक वकील के रूप में उनकी सबसे बड़ी सफलता चौरी चौरा कांड के अभियुक्तों को फांसी से बचा लेने की थी। चौरी-चौरा कांड में 170 भारतीयों को सजा-ए-मौत देने का ऐलान किया गया था, लेकिन महामना ने अपनी योग्यता और तर्क के

 शिक्षा के क्षेत्र में महामना का सबसे बड़ा योगदान काशी हिंदू विश्वविद्यालय के रूप में दुनिया के सामने आया था। उन्होंने एक ऐसी यूनिवर्सिटी बनाने का प्रण लिया था, जिसमें प्राचीन भारतीय परंपराओं को कायम रखते हुए देश-दुनिया में हो रही तकनीकी प्रगति की भी शिक्षा दी जाए। यूनिवर्सिटी बनवाने के लिए उन्होंने दिन रात मेहनत की और 1916 में भारत को बीएचयू के रूप में देश को शिक्षा के क्षेत्र में एक अनमोल तोहफा दे दिया।

 मदन मोहन मालवीय हिंदू महासभा के सबसे असरदार नेताओं में से एक थे। वह स्वभाव में बड़े उदार, सरल और शांति प्रिय व्यक्ति थे। मालवीय कैसी शख्सियत थे इसका अंदाजा इसी से लगया जा सकता है कि खुद गांधी जी उन्हें नवरत्न कहते थे। जिंदगी भर देश और समाज की सेवा में लगे रहने वाले महामना का वाराणसी में 12 नवंबर 1946 को 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। जाहिर है ऐसे रत्न को भारत रत्न मिलना हम सबके लिए गौरव की बात है। गाँधी जी मालवीय जी को नवरत्न कहते थे और अपने को उनका पुजारी।
बल पर 151 लोगों को फांसी के फंदे से छुड़ा लिया था।
देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और महामना मदन मोहन मालवीय को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किए जाने का ऐलान हुआ हैं..। सम्मान की घोषणा दोनों विभूतियों के जन्मदिन 25 दिसंबर से एक दिन पहले हुआ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इन विख्यात हस्तियों को देश का सबसे बड़ा सम्मान राष्ट्र के प्रति उनकी सेवा का उचित मान है।
भारत के सर्वाधिक करिश्माई नेताओं में से एक वाजपेयी को एक महान नेता और  बीजेपी का उदारवादी चेहरा बताया जाता है। पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे वाजपेयी को देश की बेहतरी के लिए कई ठोस पहल करने का श्रेय दिया जाता है। खासकर भारत और पाकिस्तान के बीच मतभेदों को कम करने का उनका प्रयास प्रमुख रूप से शामिल है। वाजपेयी, कांग्रेस पार्टी से बाहर के पहले ऐसे नेता हैं जो सबसे अधिक लंबे समय तक भारत के प्रधानमंत्री पद पर आसीन रहे। वाजपेयी को भारत रत्न देने की मांग लंबे समय से हो रही हैं। यही वजह है, कि जैसे ही भारत रत्न देने का ऐलान हुआ सुषमा स्वराज समेत बीजेपी के तमाम बड़े नेता वाजपेयी से मिलने इनके घर पहुंचकर मुबारक बाद दी। बीजेपी नेता इस ऐलान से काफी खुश है।

वाजपेयी ना केवल उम्दा किस्म के राजनेता रहे हैं बल्कि देश में एक कवि के तौर पर उनकी खास पहचान रही हैं। बीजेपी के इस दिग्‍गज नेता की पहचान हमेशा उनके जानदार भाषणों की वजह से होती रही है। संसद में उनके जानदार भाषण से विपक्षी नेता भी उनके मुरीद हो जाया करते थे। वहीं एक कवि के तौर पर वाजपेयी अपनी कविता में एक नई जान फूंक देते थे।
वहीं दूरदष्टा और महान शिक्षाविद मालवीय की मुख्य उपलब्धियों में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना शामिल है। मालवीय को स्वतंत्रता संग्राम में उनकी सशक्त भूमिका और हिंदू राष्ट्रवाद के प्रति उनके समर्थन के लिए भी याद किया जाता है। वह दक्षिणपंथी हिंदू महासभा के शुरूआती नेताओं में से एक थे। मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न मिलने पर उनके पौत्र गिरधर मालवीय ने भी खुशी जाहिर की है।
इन दो महान हस्तियों को भारत रत्न देने के ऐलान से विपक्षी दलों के नेताओं ने भी सराहना की हैं।
22 साल बाद किसी राजनेता को भारत रत्न मिला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद राष्ट्रपति से इन दोनों महान हस्तियों को भारत रत्न से सम्मानित करने की सिफारिश की थी। देश के ये दो महान नेता वास्तव में भारत के दो रत्न हैं।