Tuesday, 16 December 2014

निर्भय नहीं निर्भया

दिल्ली की सड़कों पर जनसैलाब, हर तरफ आक्रोश, धरना प्रदर्शन..सरकार के खिलाफ नारेबाजी..। .ये सियासी भीड़ नहीं आम जनता की वो ताकत है जो एकजुट हुई इंसाफ दिलाने को..। इंसाफ... देश की उस निर्भया को जो लुंजपुंज व्यवस्था का शिकार बनी, जिसके सपनों को बड़ी बेरहमी से कुचल दिया कुछ दरिंदों ने। हम बात कर रहे हैं 16 दिसंबर की उस रात की जिसमें मेडिकल की एक छात्र का सब कुछ तबाह हो गया। जी हां...दिल्ली को शर्मसार करनेवाले निर्भया रेप कांड को दो साल का वक्त गुज़र चुका है। ..16 दिसंबर के दिन चलती बस में 6 वहशी दरिंदों ने निर्भया के साथ जानवरों से भी बदतर सलूक किया। उसकी अस्मत लूटी और उसे पीट पीट कर अधमरा कर सड़क पर मरने के लिए फेंक दिया। कई दिन तक निर्भया दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ती रही, उसे इलाज के लिए सिंगापुर भी ले जाया गया लेकिन आखिरकार वो जिंदगी की जंग हार गई। इस घटना ने आम आदमी को झकझोर के रख दिया। इसका असर दिल्ली ही नहीं पूरे देश में देखने को मिला। लोग इंसाफ के लिए सड़कों पर उतर आए...। जनआक्रोश से दबाव में आई पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने में देर नहीं लगाई। कोर्ट में सनवाई के दौरान मुख्य आरोपी राम सिंह की जेल में संदिग्ध मौत हो गई। और नौ महीने की सुनवाई के बाद निर्भया के चारों बलात्कारियों को मौत की सजा सुनाई गई। पांचवें आरोपी के नाबालिग होने की वजह से उसे मात्र तीन साल की सजा हुई।


 निर्भया अपनी मां से ये कह कर घर से निकली थी कि वो तीन-चार घंटों में वापस आ जाएगी.... लेकिन उसे क्या पता था कि तीन घंटे का ये इंतजार कभी खत्म नहीं होगा। निर्भया का परिवार आज भी उस हादसे को भूल नहीं पाया है। उसके पिता कहते हैं कि निर्भया आज भी उन सबके बीच जिंदा है। आंसुओं से बोझिल निर्भया के पिता की आंखों को अभी तक बेटी के घर लौटने का इंतजार है...जबकि वो जानते हैं कि अब निर्भया कभी उनके बीच नहीं आएगी...वहीं निर्भया का दोस्त आज तक उस खौफनाक वारदात को भुला नहीं पाया है...जब उसकी आंखों के सामने निर्भया के जिस्म की धज्जियां उड़ाईं गई थीं...इस घिनौनी वारदात ने निर्भया से जुड़े एक-एक शख्स को इतने गहरे जख्म दिए हैं...जिनके दर्द का अंदाजा लगा पाना भी मुमकिन नहीं।

16 दिसंबर 2012.... एक साल पहले इसी दिन दिल्ली में दरिंदगी की सबसे खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया था.... दिल्ली की सड़कों पर चलती बस में एक छात्रा के साथ 6 दरिंदों ने गैंगरेप किया...और सर्दी की ठिठुरती रात में..उसे अधमरी हालत में सड़क किनारे फेंक दिया...गैंगरेप की इस घिनौनी वारदात ने पूरे देश को जगाया...दरिंदों की हैवानियत का शिकार हुई निर्भया ने लंबी जद्दोजहद के बाद दम तोड़ दिया... और अपने पीछे वो महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई सवाल छोड़ गई...सबसे बड़ा और अहम सवाल ये है... कि महिलाओं के लिए आखिर कितनी सुरक्षित है राजधानी दिल्ली ?

 दिल्ली में बढ़ते अपराध की हद !

 टूटा 13 सालों का रिकॉर्ड
 
 निर्भया के साथ हुए गैंगरेप मामले के बाद... सरकार की तरफ से दिल्ली के हालात बदलने के भरपूर दावे किए गए... लेकिन इस दावों में कितना दम है... ये आज हम दिखाएंगे आपको...नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानि NCRB के आंकड़ों की मानें..तो गैंगरेप की वारदात के बाद... दिल्ली के क्राइम रेट में इजाफा हुआ है... बलात्कार, महिला उत्पीड़न और छेड़छाड़ से जुड़े मामलों में भी बढ़ोतरी देखते को मिली...आंकड़े बयां करते हैं कि पिछले 13 सालों में.... 2013 में बलात्कार के सबसे ज्यादा केस सामने आए....

 NCRB के आंकड़ों के मुताबिक साल 2012 में बलात्कार के 706 मामले सामने आए हैं... जबकि साल 2011 में ये गिनती 572 थी..और साल 2010 में रेप के 507 मामले दर्ज किए गए थे... मतलब साफ है कि साल-दर-साल महिलाओं के प्रति अपराध में बढ़ोतरी हो रही है.... (इस लाइन के ग्राफिक्स नीचे हैं)


 क्या कहते हैं NCRB के आंकड़े ?

 साल 2012 बलात्कार के 706 मामले दर्ज

 साल 2011 बलात्कार के 572 मामले दर्ज

 साल 2010 बलात्कार के 507 मामले दर्ज

 अगर बात की जाए दिल्ली पुलिस के आंकड़ों की...तो दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक... राष्ट्रीय राजधानी में 2013 में बलात्कार के कुल 1,493 मामले दर्ज किए गए... जो कि 2012 में दर्ज हुए मामलों की तुलना में... दोगुने से भी ज्यादा हैं...जी हां ये सच्चाई है...और इस सच्चाई को बयां करने वाली भी खुद दिल्ली पुलिस है....सबसे बड़ी हैरत वाली बात ये है कि महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न के मामलों में पांच गुना बढोतरी दर्ज की गई है...2013 में पिछले साल के 625 मामलों की तुलना में 3237 मामले दर्ज किए गए...महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ के मामलों में भी इजाफा हुआ है...पिछले साल के 165 मामलों की तुलना में इस साल 852 मामले दर्ज किए गए....आंकड़े ये भी कहते हैं...कि यहां 10 में से केवल एक महिला काम के लिए बाहर जाती है....

 क्या कहता है दिल्ली पुलिस का क्राइम चार्ट ?

 30 नवंबर 2013 तक दिल्ली में बलात्कार के 1,493 मामले दर्ज।

 एक साल में पांच गुना तक बढ़े महिला उत्पीड़न के मामले।

 साल 2012 में महिला उत्पीड़न के 625 मामले

 साल 2013 में महिला उत्पीड़न के 3,237 मामले

 साल 2012 में महिला छेड़छाड़ के 165 मामले

 साल 2013 में महिला छेड़छाड़ से जुड़े 852 मामले

दिल्ली पुलिस महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कितनी सजग और सतर्क है...इसकी बानगी बयां कर रहे हैं ये आंकड़े... बेशक पुलिस अपराध को काबू करने में नाकाम साबित हो रही हो... लेकिन अपने दामन पर लगे दाग को धोने में दिल्ली पुलिस को महारथ हासिल है...पुलिस का दावा है कि ये आंकड़े इसलिए बढ़ रहे हैं... क्योंकि लोग अब जागरुक हो गए हैं और मामले दर्ज कराने लगे हैं, जबकि पहले ऐसे मामले दर्ज ही नहीं कराए जाते थे।
  दिल्ली पुलिस का ये भी दावा है कि गैंगरेप की वारदात से सबक लेकर...उसने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए...मसलन थानों में महिला सुरक्षा डेस्क बनाई गई....ताकि महिलाएं राजधानी में कहीं भी मामला दर्ज करा सकें....यही नहीं क्राइम अगेंन्स्ट विमेन शाखा का गठन किया गया... इसके अलावा महिलाओं के लिए चार हेल्पलाइन नंबर चलाए गए...रात के वक्त शहर में गश्त बढा दी गई...
 लेकिन ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि.... इस सबके बावजूद दिल्ली पुलिस यहां के अपराधियों पर लगाम क्यों नहीं लगा पाई...इतनी बड़ी वारदात के बाद भी आखिर क्यों राजधानी की महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं... क्यों बेखौफ अपराधी महिलाओं पर जुल्म ढहाते हैं...और क्यों शाम ढलते ही लड़कियों को दिल्ली में डर सताने लगता है... आखिर क्यों महिलाओं से जुड़े आपराधिक मामले कम होने का नाम नहीं लेते। 
निर्भया ने क्या कुछ बदला ?

क्या कुछ बदलना है बाकी ?

दिल्ली में हुए गैंगरेप के बाद कानून व्यवस्था में कई बदलाव किए गए...जबकि कई अभी भी होने बाकी हैं... इसे कड़े कानून का असर कहिए या कुछ और...कि अब महिलाओं में अपने ऊपर होने वाले जुल्म-ओ-सितम के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत बढ़ी है।

सख्त हुआ कानून

निर्भया की मौत के बाद कानून में कई परिवर्तन किए गए हैं...अब ना सिर्फ बलात्कार करने वालों को कड़ी सजा सुनाई जाएगी..बल्कि छेड़छाड़, फब्तियां कसने वाले औऱ घूरने जैसे अपरपाधों को भी इसी श्रेणी में शामिल किया गया है... धाया 376 के तहत ... सिर्फ पीड़िता के बयानों के आधार पर ही मुकदमा दर्ज कराने की व्यवस्था की गई।

पोस्को एक्ट का गठन

16 दिसंबर की वारदात के बाद नाबालिग बच्चों का यौन उत्पीड़न करने वालों पर भी सख्त कानून बनाए गए.. पोस्को एक्ट के तहत ऐसे आरोपी के खिलाफ गैर जमानती धाराएं लगाई जाती हैं..और साथ ही दोषी के खिलाफ सख्त सज़ा के प्रावधान हैं।

फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन

गैंगरेप मामले की जल्द सुनवाई के लिए 20 जनवरी 2013 को फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया... ऐसे मामलों को निपटाने के लिए 5 और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे।

181 पर शिकायतें बढ़ी

दिल्ली गैंगरेप के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए 181 नंबर की हेल्पलाइन सेवा शुरू की गई थी...यकीन करना मुश्किल है लेकिन ये सच्चाई है कि पिछले कुछ महीनों में इस नंबर पर 10 लाख कॉल्स आ चुकी हैं...और हर रोज़ तकरीबन 2000 कॉल आती हैं। जबकि रोजाना 500 सौ से ज्यादा मिस्ड कॉल भी दर्ज की जाती हैं।

मुआवजे की रकम में इजाफा
दो साल पहले बलात्कार की महज़ 03 पीड़िताओं को मुआवजा दिया गया था..जबकि पिछले साल 160 रेप विक्टिम्स को मुआवजा दिया जा चुका है। दो साल पहले मुआवजा देने में जहां सिर्फ 4 लाख रुपये खर्च हुए थे... वहीं पिछले साल मुआवजे की राशि 62 लाख हो गई।
निर्भया ने क्या कुछ बदला ?  
क्या कुछ बदलना है बाकी ?


कई जगह बदलाव की दरकार 

नहीं शुरू हुआ निर्भया फंड

साल 2013-14 के बजट में निर्भया फंड बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ था...इसमें 1000 करोड़ के सरकारी खर्च से निर्भया निधि बनाए जाने का भी प्रस्ताव था..लेकिन कश्मकश देखिए कि ये आज तक लागू नहीं हो सका।

नहीं मिलती आर्थिक सहायता

केन्द्र सरकार ने महिलाओं के लिए 97 हजार करोड़ रुपये जारी किए थे...इसमें कई योजनाओं के तहत महिलाओं को उस राशि का लाभ मिलना था..लेकिन अभी तक किसी भी महिला को इसका फायदा नहीं मिल पाया है।


महिला सशक्तीकरण की बैठक नहीं

साल 2010 में महिला सशक्तीकरण समिति का गठन किया गया... इसके तहत हर जिले में महिला बाल विकास के तहत समिति गठित की जानी थी... लेकिन ये योजना शुरू होने से पहले ही ठंडे बस्ते में चली गई।

महिला सुरक्षा में सरकार विफल
दिल्ली गैंगरेप के बाद सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक कमेटी का गठन किया था...जस्टिस ऊषा मेहरा को उस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था... जस्टिस मेहरा ने महिला सुरक्षा को लेकर की जा रही कोशिशों को नकार दिया है...जस्टिस मेहरा खुद इस बात को मानती है कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा करने में पूरी तरह नाकाम रही है।

निर्भया मामले में कब क्या-क्या हुआ ? 

तारीख- 16 दिसंबर 2012

दिल्ली के वसंत विहार इलाके में मेडिकल की छात्रा के साथ 6 दरिदों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। जिसके बाद अधमरी हालत में पीड़िता को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।

17 दिसंबर 2012

इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने वाले चार आरोपियों की पुलिस ने शिनाख्त की।

18 दिसंबर 2012

राम सिंह और अन्य तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

20 दिसंबर 2012

पीड़िता के दोस्त के बयान दर्ज किए गए।

21 दिसंबर 2012

दिल्ली के आनंद विहार बस अड्डे से जुवेनाइल आरोपी गिरफ्तार

22 दिसंबर 2012

मामले के पांचवें आरोपी अक्षय ठाकुर को बिहार के औरंगाबाद से गिरफ्तार किया गया। पीड़िता ने एसडीएम के सामने बयान दर्ज कराए

23 दिसंबर 2012

दिल्ली की बिगड़ी कानून व्यवस्था पर जनआक्रोश का आगाज हुआ, पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए लोग सड़कों पर उतरे।

26 दिसंबर 2012

पीड़िता की बिगड़ती हालत को देखते हुए सरकार ने उसे इलाज के लिए सिंगापुर भेजा।

29 दिसंबर 2012

रात के 2.15 पर निर्भया ने दुनिया को अलविदा कह दिया और इसी के साथ ही पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया।

2 जनवरी 2013

निर्भया मामले की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया।

17 जनवरी 2013

पांचों आरोपियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई शुरू की गई।

28 जनवरी 2013

गैंगरेप के एक आरोपी को अदालत में नाबालिग साबित किया गया।

11 मार्च 2013

दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद आरोपी राम सिंह की संदिग्ध हालत में मौत।

22 अगस्त 2013

नाबालिग अपराधी को सज़ा सुनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट को निर्देश जारी किए।

31 अगस्त 2013

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाबालिग को तीन साल कैद की सज़ा सुनाई।

10 सितंबर 2013

अदालत ने गैंगरेप के चारों आरोपियों को दोषी करार दिया।

13 सितंबर 2013

दिल्ली की साकेत कोर्ट में चारों अपराधियों के खिलाफ सज़ा-ए-मौत का ऐलान किया गया।

13 मार्च 2014
दिल्ली हाई कोर्ट ने चारों दोषियों की सज़ा को बरकरार रखा।
15 मार्च 2014
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी मुकेश और पवन की फांसी पर रोक लगाई।
14 जुलाई 2014
सुप्रीम कोर्ट ने अन्य दोनों दोषियों विनय और अक्षय की फांसी पर भी रोक लगा दी