Tuesday, 19 August 2014

पाकिस्तान को मिला करारा जवाब



जब नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ को बुलाया था....तो लगा था कि दोनों मुल्कों के बीच संबंध सुधरेंगे.....लेकिन अब भारत ने पाकिस्तान के साथ 25 अगस्त को होने वाली विदेश सचिव स्तर की बातचीत रद्द कर दी है। भारत ने ये कड़ा फैसला क्यों लिया...और इस फैसले से दोनों देशों के संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है...
फिर सामने आई
पाक की नापाक हरकत
 भारत ने दिया
करारा जवाब
 दोनों देशों के बीच
बातचीत रद्द
भारत ने पाक के साथ 25 अगस्त को होने वाली विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द कर दी है। सरहद पर पाकिस्तान की तरफ से लगातार की जा रही गोलीबारी और हुर्रियत नेता की पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित के साथ हुई बैठक से भारत बेहद नाराज है। इससे नाराज भारत ने 25 अगस्त को इस्लामाबाद में होने वाली... विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द कर दी है। भारत ने कहा है कि वो अंदरूनी मामलों में पाकिस्तान का दखल कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। गौरतलब है कि भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने सचिव स्तर की बैठक से पहले...जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता से दिल्ली में बातचीत की। जिसपर भारत सरकार ने सख्त रवैया अपनाते हुए.. 25 अगस्त को होने वाली विदेश सचिव स्तर की बैठक को ही रद्द कर दिया।
भारत के कड़े तेवर
पाक को करारा जवाब
विदेश सचिव सुजाता सिंह ने पाक उच्चायुक्त को विदेश मंत्रालय बुलाकर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान तय कर ले कि उसे अलगाववादियों से बात करनी है या भारत से।’ सुजाता सिंह ने ये भी साफ कर दिया कि पाक उच्चायुक्त ने जिस तरह अलगाववादी हुर्रियत के गुटों को बातचीत के लिए बुलाया है... इसे भारत ने अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप माना है।उन्होंने कहा कि भारत के अंदरूनी मामलों में पाकिस्तान के लगातार दखल देने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भारत के सख्त रवैये से
पाकिस्तान का लगा झटका
पाक की नापाक हरकत पर भारत के कड़े फैसले के बाद... पाकिस्तान को गहरा धक्का लगा है...पाक विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तसनीम असलम ने कहा कि... अलगाववादी नेताओं से हम पहले भी ऐसी मुलाकातें करते रहे हैं। भारत का फैसला बड़ा झटका है।  लेकिन पाक की तरफ से दिया गया ये महज़ दिखावा ही कहिए..क्योंकि विदेश सचिव स्तर की वार्ता को रद्द किए जाने के बावजूद...वो हुर्रियत नेताओं से मुलाकात पर अडिग है। पाक के इस अडियनपन को देखते हुए गृह मंत्रालय में बैठक बुलाई गई। जिसमें सरकार पाकिस्तान को लेकर... अपनी आगे की रणनीति तैयार कर रही है।देखना ये होगा कि पाक की इस ओछी हरकत के खिलाफ देश की सरकार... क्या कुछ सख्त फैसले लेती है। 
भारत की आपत्ति के बावजूद पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने दिल्ली में... अलगाववादी नेता शब्बीर शाह से मुलाकात की। इस बैठक को लेकर भारत ने कड़ा एतराज जताया है। भारत ने साफ-साफ कह दिया है कि अंदरूनी मामलों में  पाकिस्तान की दखलंदाजी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यहीं नहीं भारत ने सीमा पार से होनी वाली फायरिंग पर भी आपत्ति जताई है.. सीमा पार से लगातार हो रहे सीजफायर के उल्लंधन को भी...वार्ता के रद्द होने के पीछे...बड़ी वजह माना जा रहा है।
बात को बेताब पाक
लेकिन कर रहा घात  
विजय कुमार राय

पाकिस्तान भारत का ऐसा पड़ोसी मुल्क है जो बातचीत के लिए बेताब भी दिखता है लेकिन घात करने से बाज नहीं आता। पाकिस्तान भारत के साथ संबंधों को लेकर कितना गंभीर है, इस बात का अंदाजा सीमा पर हो रही गोलीबारी से ही लगाजा जा सकता है...जिस तरह से पिछले कुछ दिनों में भारत-पाक सीमा पर पाकिस्तानी रेंजरों की तरफ से..शिमला समझौते की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वो वाकई हैरान करने वाली बाती है... पाकिस्तान की तरफ से भारतीय चौकियों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर गोलीबारी की जा रही है... सीमा पर संघंर्ष विराम के उल्लंधन की घटनाओं से भी सरकार नाराज है। पाकिस्तान ने रविवार रात भी संघर्षविराम का उल्लंघन करते हुए सीमा पर भारी गोलीबारी की। जम्मू सेक्टर के अरनिया और आरएस पुरा सब सेक्टर की 20 सीमा चौकियों और आबादी वाले इलाकों पर मोर्टार दागे गए और अत्याधुनिक हथियारों से गोलीबारी की। पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर के उल्लंघन की ये कोई पहली घटना नहीं है... पिछले 10 दिनों में पाकिस्तान 11 बार सीजफायर का उल्लंघन कर चुका है...अगस्त में अब तक 12वीं बार पाक की तरफ से ये हरकत की गई है.. 17 अगस्त की रात पाक रेंजर्स ने भारतीय सेना की 20 चौकियों पर गोले दागे।
लेह लद्दाक के दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को दो टूक जवाब देते हुए कहा था कि उसमें सीधे युद्द करने की ताकत नहीं है। इसलिए वो आतंकवाद की आड़ में युद्ध कर रहा है। शायद यही वजह है कि पीएम के इस बयान से बौखलाया पाकिस्तान अब अलगाववादियों के जरिये ओछी हरकत पर उतर आया है। पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को लेकर भले ही मोदी सरकार काफी गंभीर हो लेकिन पीएम मोदी को 1999 का वो दौर याद करना होगा...जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शांति का पैगाम लेकर... बस से पाकिस्तान गए थे और पड़ोसी मुल्क ने तोहफे में हमें करगिल के वो गहरे ज़ख्म दिए...जिन्हें चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता। जाहिर है पाकिस्तान पर जब जब भरोसा किया गया तब तब उसने भरोसे का कत्ल करने में देर नहीं लगाई।  
 भारत की तरफ से....पाकिस्तान से खराब संबंधों को सुधारने की कोशिशें लगातार होती रही हैं...मोदी सरकार ने भी इस मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए... अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाक पीएम नवाज़ शरीफ को न्यौता भेजा...मोदी की मंशा से साफ हो गया था कि वो पड़ोसी मुल्कों से संबंधों को लेकर कितने गंभीर हैं...लेकिन पाकिस्तान भारत से संबंधों को लेकर कितना सजग है... इसके सुबूत हमे बड़े ज़ख्मों के तौर पर वक्त-दर-वक्त मिलते रहे हैं। आप भी देखिए.. शांति और दोस्ती का हाथ बढ़ाने वालों के साथ कैसा सलूक करता है पाक।
तारीख - 26 मई 2014
ये वो दिन था... जब देश के नए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने..राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में..प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी... इस शपत ग्रहण समारोह में देश-विदेश के तमाम मेहमानों ने शिरकत की...मोदी ने सभी एशियाई देशों के प्रतिनिधियों को बुलाया...और उनकी शानदार मेहमान नवाजी भी की...खास बात ये रही कि इस शपत ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी मौजूद रहे... इस शपथ ग्रहण समारोह से ये साफ हो गया कि मोदी पड़ोसी मुल्कों से बेहतर संबंध बनाना चाहते हैं। फिर चाहे वो पाकिस्तान ही क्यों न हो.... मोदी ने नवाज शरीफ की मां को तोहफे में शॉल भेजकर....दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों की नींव रखी थी.... लेकिन पाकिस्तान की गद्दारी के आगे...सारी कोशिशें धरी की धरी रह गईं। भारत अच्छे संबंधों की कोशिशों में लगा रहा...लेकिन अच्छे संबंधों की आड़ में पाकिस्तान लगातार भारत को धोखा देता रहा। कभी सीमापार से गोलियां बरसाकर तो कभी हुर्रियत नेताओं से मुलाकात कर पड़ोसी मुल्क अपनी गद्दारी के सुबूत पेश करता रहा।
प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान से संबंध सुधारने की पहल की... लेकिन पाकिस्तान की कूटनीति ने इस कोशिश पर विराम लगा दिया। इससे पहले भी कई बार भारत-पाक के बेहतर संबंधों को लेकर...बातचीत की तैयारियां की जा चुकी हैं...लेकिन पाकिस्तान की अंदरूनी ताकतों ने हर बार उस शांति वार्ता से पहले ही माहौल खराब कर दिया। कभी पाकिस्तानी सेना ने सीजफायर का उल्लंधन किया...तो कभी पाक में बैठे आतंकी संगठनों ने.. भारत में अपनी नापाक साजिश को अंजाम देकर... बातचीत में रुकावट पैदा कर दी।



बातचीत में बाधा बने आतंकी हमले

तारीख - 26 सितंबर 2013
भारत और पाक पीएम की न्यूयॉर्क में मुलाकात के पहले जम्मू में दो हमले

तारीख - 13 जुलाई 2011
भारत-पाक के विदेश मंत्रियों की इस्लामाबाद में वार्ता के पहले मुंबई में धमाके

तारीख - 13 फरवरी 2010
25 फरवरी को विदेश सचिव स्तर वार्ता से पहले पुणे की जर्मन बेकरी में विस्फोट

तारीख - 26 नवंबर 2008
नई दिल्ली में भारत-पाक विदेश मंत्रियों में वार्ता के बीच मुंबई हमला, वार्ता स्थगित

जी हां ये पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के हाथों अंजाम की गईं ये खौफनाक वारदातें इस बात का सुबूत हैं कि जब-जब भारत ने पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है... तब-तब पाकिस्तान की अंदरूनी ताकतों ने इसका विरोध किया है। हालांकि पाकिस्तान ने हर बार-बार इन आतंकी साजिशों में.. मिलीभगत से पल्ला झाड़ा है...लेकिन आतंकी हमलों की जांच में हर बार पाक का नापाक चेहरा ही सामने आया। फिर चाहे वो दिल्ली ब्लास्ट हो या मुंबई में हुआ सबसे बड़ा आतंकी हमला... हर एक साजिश में पाकिस्तानी आतंकी संगठनों का हाथ पाया गया। लेकिन पड़ोसी मुल्क हर बार...बड़ी ही बेशर्मी से... अपनी भूमिका को लेकर.. मामलों की लीपा-पोती में लगा रहा। 25 अगस्त से पहले हुर्रियत नेताओं से मुलाकात... पाकिस्तान की एक और घिनौनी साजिश का सुबूत है। 
इतिहास को खंगाला जाए तो इससे पहले भी... भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली वार्ता से पहले... हुर्रियत नेताओं की मुलाक़ातें पाकिस्तान के उच्चायुक्त, विदेश मंत्री और यहां तक कि राष्ट्रपति से भी होती रही हैं... लेकिन भारत ने कभी इन्हें राजनयिक वार्ता के एजेंडे में रोड़ा नहीं माना... ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि ऐसी ही एक मुलाक़ात को लेकर... मोदी सरकार की ज़रूरत से ज़्यादा प्रतिक्रिया को कैसे समझा जाए ?

पुराना है मुलाकातों का सिलसिला 


आगरा में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई और पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की शिखर बैठक से पहले हुर्रियत नेताओं ने दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग की तरफ़ से दिए गए भोज में हिस्सा लिया था।

यही नहीं दिल्ली में 2012 में हुई दोनों देशों की गृहसचिव स्तरीय बातचीत से पहले हुर्रियत नेता पाकिस्तानी उच्यायुक्त से मिले थे।

विदेश मंत्री रहीं हिना खर ने भी उनसे मुलाक़ात की थी जबकि नवंबर 2013 में एशिया-यूरोप बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली आए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के विदेश मामलों के सलाहकार ने भी हुर्रियत नेताओं से मुलाक़ात की थी.

उस वक़्त विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने अज़ीज़ की हुर्रियत नेताओं से इस मुलाक़ात की ये कह कर आलोचना की थी कि ये ‘रचनात्मक नहीं’ है. लेकिन यूपीए सरकार ने इसे तूल नहीं दिया था।

इतना ही नहीं 15 अप्रैल 2005  को भारतीय विदेश सचिव श्याम सरन से जब पूछा गया कि दिल्ली में भारतीय प्रधानमंत्री से मिलने से पहले हुर्रियत नेताओं से राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की मुलाक़ात पर भारत को क्या कोई समस्या है? इस पर उन्होंने कहा था कि “पाकिस्तानी नेता आते हैं, वो हुर्रियत नेताओं से मिलते हैं। हम एक लोकतांत्रिक देश हैं, हमें इस तरह की मुलाक़ातों से कोई दिक़्क़त नहीं है।” 
पाक प्रतिनिधियों की हुर्रियत नेताओं से मुलाकात का सिलसिला काफी पुराना है...कई बार ये मुलाकातें सरकार को घेरने का मुद्दा तो बनीं...लेकिन पिछली सरकार ने इन्हें कभी तूल नहीं दिया... लेकिन इस बार मोदी सरकार ने विदेश सचिव वार्ता  रद्द करके...पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है...मोदी ने पाकिस्तान को सख्त सरकार होने का आभास कराया। जाहिर है जिन बातों पर पिछली सरकारें नरमी बरतती रही हैं, मोदी सरकार उन बातों को हलके में लेने के मूड में नहीं हैं।