Wednesday, 16 July 2014

अवसरों का सम्मेलन

विजय कुमार राय......

 ब्राजील में चल रहे ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन में भारत को बड़ी कूटनीतिक कामयाबी हासिल हुई है। भारत के साथ ही ब्राजीलरूसचीन और दक्षिण अफ्रीका के बीच ब्रिक्स विकास बैंक की स्थापना का ऐतिहासिक फैसला हुआ....खास बात यह है कि जहां बैंक का मुख्यालय चीन के शंघाई शहर में होगावहीं पहले पांच साल के लिए इसकी अध्यक्षता भारत को मिली है। हालांकि भारत ने बैंक का मुख्यालय नई दिल्ली को बनाने की भरपूर कोशिश कीलेकिन ऐन वक्त पर चीन बाजी मार गया। बैठक के दौरान इस मसले पर भारत और चीन में थोड़ी तनाव की स्थिति भी बनी।
इस बैंक की शुरुआती पूंजी 100 अरब डॉलर होगी....ब्राजीलरूस, भारतचीन और दक्षिण अफ्रीका इस बैंक को 20-20 अरब डॉलर की रकम देंगे.... ये रकम ब्रिक्स देशों के नकदी संकट के समय काम आएगी.... इसके अलावा ब्रिक्स सहयोग को बढ़ावा देने में पैसा लगाया जाएगा.... साथ ही वैश्विक वित्तीय सुरक्षा को भी मजबूत किया जाएगा।
ये बैंक ठीक उसी तरह काम करेगाजिस तरह वर्ल्ड बैंक और इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड काम करता हैलेकिन इसपर दोनों  पर पश्चिमी देशों का ही प्रभाव चलता है... विकासशील देश अलग-थलग ही रहते हैंइसलिए ब्रिक्स देशों ने मिलकर अपना एक बैंक बनाने की शुरुआत की है।
ब्रिक्स देशों को बैंक के साथ ही मोदी मंत्र भी मिला. मोदी ने ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्षों को युवा शक्ति का एहसास कराया और उसे निखारनेसंवारने का रास्ता भी दिखाया.गौरतलब है कि ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली बहुपक्षीय बैठक है। इससे पहले उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी और सीमा पार घुसपैठ से लेकर कैलाश मानसरोवर यात्रा तक के सभी मुद्दों पर दो टूक लहजे में अपनी बात रखी थी।

क्या है बैंक का उद्देश्य ?
अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पश्चिमी देशों के बढ़ते प्रभाव का सामना करने के लिए 50 बिलियन डॉलर की शुरुआती पूंजी के साथ यह बैंक खोला गया है। इस राशि को बढ़ाकर 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाया जाएगा।  इसके लिए पांचों देश बीस-बीस अरब डॉलर देंगे। इस सम्मेलन के दौरान ब्राजील की प्रधानमंत्री दिल्मा रूसेफ ने कहा, ब्रिक्स डेवलपमेंट बैंक स्थापित करने से स्पष्ट है कि विभिन्न भिन्नताओं के बाद भी ब्रिक्स देश साथ हैं।
बैंक और सीआरए की स्थापना की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बैंक से अब न सिर्फ सदस्य राष्ट्रों को फायदा होगा बल्कि विकासशील विश्व को भी फायदा होगा।
वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा, ब्रिक्स बैंक आर्थिक समस्याओं का सामना करने का सबसे कारगर उपाय साबित होगा। 

इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया... कुल मिला कर देखा जाए..तो ये ऐतिहासिक फैसला सभी ब्रिक्स देशों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।
चला मोदी का जादू
भारत को मिली जीत
नए विकास बैंक की स्थापना को भारत के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है... इस पूंजी के लिए शुरुआती अंशदान में संस्थापक सदस्यों की बराबर भागीदारी होगी...दरअसलभारत इस बात पर जोर देता रहा है कि इस पर किसी भी सदस्य देश का वर्चस्व  हो।पांच राष्ट्रों की सदस्यता वाले समूह की शिखर बैठक में बैंक और 100 अरब डॉलर के शुरुआती आकार के साथ एक कंटींजेंसी रिजर्व अरेंजमेंट’ स्थापित करने का भी समझौता हुआ...इस बैंक की स्थापना में सबसे खास बात ये रही कि बैंक का पहला सीईओ भारत सेहोगाजबकि संचालन मंडल बोर्ड का पहला अध्यक्ष रूस से होगा।

नए विकास बैंक का अफ्रीकी क्षेत्रीय केंद्र दक्षिण अफ्रीका में होगा.... सम्मेलन में स्वीकार किए गए फोर्तालेजा घोषणापत्र में नेताओं ने कहा, ‘हम अपने वित्त मंत्रियों को निर्देश देते हैं कि वे इसके संचालन के लिए तौर तरीकों पर काम करें. शुरुआती पूंजी की समान साझेदारी पर भारत का जोर इस बात को लेकर रहा...कि ब्रिक्स बैंक भी अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोषयानी आईएमएफ और विश्व बैंक की तरह ब्रेटन वुड्स संस्थानों का रूप ना ले...
ब्रिक्स बैंक और सीआरए की स्थापना से अच्छे नतीजों की उम्मीद जताई जा रही है...आर्थिक स्थिरता को सुरक्षित रखने में ये दोनों संस्थान... अब नये माध्यम होंगे...मोदी ने भी इसकी सराहना करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और वित्तीय संस्थानों में सुधारों की बड़ी जरूरत हैताकि जमीनी सच्चाई जाहिर हो सके तथा एक नया वित्तीय ढांचा तैयार हो
ब्रिक्स विकास बैंक और सीआर के की स्थापना की घोषणा के साथ ही... पांच देशों के संयुक्त मंच ब्रिक्स ने अपना एक मक़सद पूरा कर लिया है...अब देखना ये होगा कि आने वाले आर्थिक संकट से निपटने में ये कितना कारगर साबित होगा।
क्या है BRICS की भूमिका ?
ब्राज़ीलरूसभारतचीन और दक्षिण अफ़्रीका का संयुक्त मंच है ब्रिक्स.... इसी की सालाना बैठक में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीब्राज़ील पहुंचे... ब्रिक्स के बारे में बहुत सी खास बाते हैं.. जिन्हें जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।
GFX IN
ब्रिक्स में क्या है खास ?

 पहली खासियत
ब्रिक्स का आइडिया सबसे पहले इनवेस्ट बैंक गोल्डमैन सैक्स के चेयरमैन जिम  नील ने 2001 में दिया था।
दूसरी खासियत
दिसंबर, 2010 से पहले तक इस समूह में दक्षिण अफ़्रीका शामिल नहीं हुआ थाइसे तब ब्रिक देशों के नाम से जानते थेसाउथ अफ़्रीका के शामिलहोने के बाद इसमें 'एसजोड़ा गया तो ये ब्रिक्स बन गया।
तीसरी खासियत
इन देशों की सालाना बैठक किसी सदस्य देश की मेज़बानी में होती है, 2012 की शिखर बैठक भारत में हुई थी।
चौथी खासियत
दुनिया के कुल सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में इन पाँचों देश की हिस्सेदारी 21 फ़ीसदी के करीब है। बीते 15 सालों में दुनिया भर के जीडीपी मेंइनकी हिस्सेदारी तीन गुना बढ़ी है।
पांचवीं खासियत
ब्रिक्स देशों में दुनिया भर की करीब 43 फ़ीसदी आबादी रहती है।
छठी खासियत
ब्रिक्स देशों के पास कुल मिलाकर करीब 44 खरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है।
सातवी खासियत
ब्रिक्स देशों के बीच आपसी कारोबार लगभग 300 अरब डॉलर तक पहुँच गया है, 2015 तक इसके 500 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. 2002 में ये महज 27.3 अरब डॉलर था।
जिस तरह ब्रिक्स ने कम समय में रिकॉर्ड तरक्की की है... और ब्रिक्स देशों के बीच आपसी तालमेल को बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई है..उम्मीद लगाई जा रही है कि आने वाले समय में ब्रिक्स और बड़े फैसले लेने और गंभीर परिस्थितियों से निपटने केलिए...पांचों देशों के लिए बेहद अहम साबित होगा।
आतंकवाद पर हुई चर्चा
मोदी ने जताई चिंता
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व के आर्थिक मंच पर तेजी से उभर रहे पांच देशों के संगठन ब्रिक्स के छठे शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मानवता के दुश्मन आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंनें कहा कि वो उस देश के निवासी है जहां परम्परा और संस्कृति विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की रही है और जहां आतंकवाद का कोई स्थान नहीं रहा है।

उन्होंने अफगानिस्तान से लेकर अफ्रीका तक के पूरे क्षेत्रों में आतंकवाद के कारण उत्पन्न अशांति एवं अस्थिरता पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों में और सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। मोदी ने बैठक केनिजी सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवाद से जूझ रहे देशों की पीड़ा के प्रति मूक दर्शक बना रहना बेहद घातक सिद्ध हो सकता है।

उन्होंने साइबर सुरक्षा के खतरे के प्रति ब्रिक्स देशों को अगाह करते हुए कहा कि साइबर अवसरों की खान है। इसकी सुरक्षा के लिए ब्रिक्स देशों को आगे आना चाहिए। इससे पहले ब्रिक्स देशों के सभी नेताओं ने मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया।

आपको बता दें कि भारतब्राजीलरूसचीन और दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स के सदस्य देश हैं। ब्रिक्स देशों में मोदी की विशेष रूचि और उनके प्रति खासी चर्चा हो रही है... जिन्होंने हाल ही में.. भारत में भारी बहुमत हासिल करके सरकार बनाई है। ऐसे में आतंकवाद पर मोदी ने जो भाषण दिया...ब्रिक्स देशों में उसकी खूब वाहवाही हुई।