Wednesday, 18 June 2014

हाय ये महंगाई


तरफा बढ़ती महंगाई की मार... जिससे जनता में मच गया है हाहाकार... महंगाई के मोर्चे पर एक बार फिर निराशा हाथ लगी है। थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई... और इसपर काबू पाने में एक बार फिर सरकार फ्लॉप साबित हुई। जी हां अच्छे दिनों का वादा करने वाली मोदी सरकार के लिए महंगाई मुसीबत बनती जा रही है...पिछली सरकार महंगाई पर काबू पाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई.... बीजेपी ने शुरू से ही महंगाई को अपना मुख्य एजेंडा बनाया... लेकिन इसपर काबू पाना इतना आसान नहीं...चौतरफा बढ़ती महंगाई को देखकर तो लगता है कि...ये महंगाई अब मोदी के लिए भी मुसीबत बनती जा रही है।
देश में फिर गहराया
महंगाई का संकट

मोदी सरकार के लिए
महंगाई बनी मुसीबत

जनता ने उठाया सवाल
महंगाई से कैसे निपटेगी सरकार ?

दूध महंगा, सब्जी महंगी
महंगाई की चौतरफा मार

डीजल-पैट्रोल होंगे महंगे
प्याज के दामों पर हाहाकार

सब्सिडी का अटका फंदा
रेलवे को भी बढोतरी की दरकार

महंगाई ने बिगाड़ा बजट

सबको अच्छे दिनों का इंतजार


केन्द्र में मोदी सरकार के आते ही... अच्छे दिन आए हैं या नहीं फिलहाल ये कह पाना थोड़ा मुश्किल है... लेकिन आसमान छूती महंगाई से राहत पाने की उम्मीद कर रहे लोगों के लिए बुरी खबर ये है कि पिछले पांच महीनों में महंगाई दर अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। और इसका असर भी बाजार में देखा जा सकता है.. अनाज से लेकर दालों तक.. दूध से लेकर फलों और सब्जियों तक...इंसान की मूलभूत जरूरतों से जुड़ी सभी चीजों पर महंगाई की मार पड़ रही है।
महंगाई से निजात दिलाने का वादा करनेवाली मोदी सरकार महंगाई कम करने के प्रयास में अब तक नाकाम रही है... ताजा आंकड़ों के मुताबिक मई में महंगाई थोक दर बढ़कर 6.01 फीसदी हो गयी जो दिसंबर 2013 के बाद सबसे उच्च स्तर पर है।
देश में महंगाई से हाहाकार
अच्छे दिन कब लाएगी सरकार ?
महंगाई के मुद्दे को हवा दे सत्ता में आई बीजेपी के लिए अब महंगाई ही सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है..। सौ दिन में महंगाई रोकने के कांग्रेस के दावों की खिल्ली उड़ाने वाले मोदी के पास भी अब महंगाई की मार से लोगों को राहत देने के लिए कोई फौरी योजना नहीं है। सोमवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार मई में थोक महंगाई दर बढ़कर 6.01 फीसदी हो गयी जो अप्रैल में थी 5.2 फीसदी  पर थी। दिसंबर 2013 के बाद  अपने उच्चतम स्तर पर है। हालांकि महंगाई के ये आंकड़े सरकार बनने से पहले के हैं। 
पांच महीनों में सबसे ज्यादा महंगाई
मई में थोक महंगाई दर बढ़कर 6.01 फीसदी
अप्रैल में थी 5.2 फीसदी  महंगाई दर
दिसंबर 2013 के बाद उच्चतम स्तर पर
महंगाई दर में ये बढ़ोतरी खाद्य और ईंधन कीमतों में हुए उछाल की वजह से हुई है। ये जानकारी सरकारी आंकड़े में सामने आई....केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़े के मुताबिक , ईंधन और बिजली की महंगाई दर, डीजल कीमतों में 14.21 फीसदी वृद्धि की वजह से बढ़कर 10.53 फीसदी हो गई। पेट्रोल की कीमत 12.28 फीसदी बढ़ गई। खाद्य महंगाई दर बढ़कर 9.50 फीसदी हो गई। आलू की कीमत में सबसे ज्यादा 31.44 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। फल 19.40 फीसदी महंगे हो गए, जबकि दूध की कीमत में 9.75 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
कहां कितनी महंगाई बढ़ी -
डीजल                14.21 %
ईंधन और बिजली       10.53 %
पेट्रोल                 12.28 %
आलू                  31.44 %
फल                  19.40 %
दूध                   9.75 %
गौरतलब है कि मोदी सरकार ने महंगाई काबू करने को अपने एजेंडे में सबसे ऊपर रखा है, लेकिन हालात ऐसे बन रहे हैं कि सरकार के लिए बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण मुश्किल हो सकता है। मई की महंगाई दर का आंकड़ा तो बढ़ कर आया ही है, अब आगे कीमतें और ऊपर जाने का खतरा बन गया है। महंगाई बढ़ने के साथ ही मोदी के लिए अच्‍छे दिन लाने की चुनौती भी बढ़ गई है...देश से अच्‍छे दिन लाने का वादा कर चुके पीएम नरेंद्र मोदी ने अब कहा है कि कुछ कड़े फैसलों के लिए तैयार रहना होगा, लेकिन एक तरफ बढ़ती महंगाई और दूसरी तरफ मोदी के कड़े फैसलों की चेतावनी के बाद....ये सवाल भी गहराने लगा है कि कि अच्‍छे दिन आखिर कैसे आएंगे?

चौतरफा महंगाई की मार से ना सिर्फ आम आदमी परेशान है.. बल्कि सरकार के लिए भी ये महंगाई मुसीबत बनी हुई है... खाने-पीने की चीजों पर सबसे ज्यादा महंगाई का असर पड़ा है...लेकिन सवाल ये खड़ा होता है कि आखिर महंगाई क्यों बढ़ रही है..आखिर क्या वजह है कि आपकी सारी कमाई...महंगाई नाम की ये डायन खाए जा रही है।
महंगाई का जिम्मेदार कौन ?
देश में नई सरकार बनी...नई योजनाओं का आगाज़ हुआ... पिछली सरकार की सबसे बड़ी खामियों में से एक महंगाई को दूर करने के लिए नीतियां निर्धारित की गईं... लेकिन महंगाई की मुसीबत ने जनता का पीछा नहीं छोड़ा... महंगाई पर काबू पाने में पिछली सरकार पूरी तरह नाकाम नज़र आई...और नई सरकार भी.. इस मुसीबत में घिरती नज़र आई। फल, सब्जियां, दूध, अनाज, दालें और ईंधर सब कुछ महंगा हो गया। इस महंगाई ने ना सिर्फ जनता को करारा झटका दिया..बल्कि सरकार को गंभीरती से सोचने पर मजबूर कर दिया। बड़े-बड़े अर्थशास्त्री महंगाई के कारणों को लेकर अलग-अलग तर्क दे रहे हैं।
कम मानसून का खतरा
पैदावार में कमी का डर
जमाखोरों ने भरा खजाना
महंगाई का ग्राफ पहुंचा ऊपर
इस बार शुरू से ही मानसून के कमजोर रहने की आशंका जताई जा रही है... मौसम विभाग के अलावा प्रोइवेट वेदर टेलिकास्ट कंपनी स्काई मेट भी अपनी रिपोर्ट में कम मानसून की चेतावनी दे चुकी है... जाहिर है कम बारिश का असर कई फसलों पर पड़ सकता है...लिहाजा कम पैदावार की आहट ने जमाखोरों और बिचौलियों को पहले ही सतर्क कर दिया है... और उन्होंने खाद्य सामग्रियों की जमाखोरी शुरू कर दी है..जिसके चलते बाजार में आपूर्ति प्रभावित हुई और कमोडिटीज़ के दाम बढ़ गए। केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने भी बढ़ती महंगाई का ठीकरा कमजोर मॉनसून की आशंका और खाद्य जमाखोरी पर फोड़ा है। अरुण जेटली ने मंहगाई बढ़ने के बारे में जो कहा वो भी गौर करने लायक है। फेसबुक पेज पर उन्होंने लिखा.... खाने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी को जमाखोरी और कमजोर मॉनसून की आशंका से जोड़ा जा सकता है राज्य सरकारों को जमाखोरी रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए,  सरकार ऐसे कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है जो जीडीपी और विकास दर को बढ़ाए उम्मीद है महंगाई दर पर कुछ दिनों में काबू पा लिया जाएगा
चुनाव से चरमराई अर्थव्यवस्था
महंगाई ने तोड़ी जनता की कमर
चुनावों के बाद अक्सर महंगाई बढ़ती है....कुछ लोग इस महंगाई के पीछे भी चुनाव में हुए अनाब-शनाब खर्चे को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। लेकिन जिस तरह कुछ खास चीजों के दामों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है...उसे देखकर नहीं लगता कि महंगाई की इस मार के पीछे...चुनाव का कोई लेना-देना है।
अब वजह चाहे जो भी हो...लेकिन ये तो साफ है कि महंगाई ने जनता की मुसीबत को बढ़ा दिया है... और इसमें कोई दोराय नहीं कि अगर जनता की मुसीबत बढ़ी तो सरकार की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।
 पिछले पांच महीनों में महंगाई दर अपने उच्चतर स्तर पर पहुंच गई है... और आने वाले दिनों में ये महंगाई आपको और ज्यादा परेशान करने वाली है...जी हां खान-पान और रसोई के अलावा भी आपको महंगाई के दर्द से दो-चार होना पड़ेगा। इतना ही नहीं कई जीचों पर सरकार सब्सिडी हटाने पर भी कर रही है विचार...जिससे महंगाई की मार दोगुनी रफ्तार के साथ करेगी.. आपकी जेबों पर प्रहार... तो आप भी हो जाइए तैयार... महंगाई पर जल्द मचने वाला है हाहाकार।
प्याज पर जब-जब महंगाई बढ़ी है..तब-तब हाहाकार मचा है..और सरकार की फजीहत हुई है... इस स्थिति से निपटने के लिए केन्द्र सरकार ने प्याज का Maximum export price यानी MEP निर्धारित किया है..ताकि देश में प्याज की कमीं न हो...लेकिन सरकार का ये कदम कितना कारगर साबित होगा...फिलहाल कहना मुश्किल है। काबिल-ए-गौर है कि अगर पैट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़े तो रेल और बस के किराए में भी बढ़ोतरी हो जाएगी... ऐसे में जब सबकुछ महंगा होगा...तो देश में अच्छे दिनों का सपना देखना कितना सही है।
और बढ़ सकती है महंगाई
पैट्रोल-डीजल होंगे महंगे !
प्याज के बढ सकते हैं दाम
रेल के किराए में बढ़ोतरी तय
फल-सब्जी अनाज और दालें....महंगाई का सबसे ज्यादा असर आम आदमी की रसोई पर पड़ा है... महंगाई ने लोगों का स्वाद बिगाड़ दिया है...ऐसे में प्याज के दामों में भारी बढ़ोतरी की अनुमान लगाया जा रहा है...यानी एक बार फिर ये प्याज आम आदमी के आंसू निकालने वाला है... जब-जब प्याज पर महंगाई की मार पड़ी है.. तब-तब इसकी कीमतों ने आसमान छुआ है। और एक बार फिर यही प्याज आम आदमी की पहुंच से दूर होने वाली है। जी हां देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी नासिक में..मजदूरों की हड़ताल को लेकर...प्याज की खरीद-फरोख्त रुक गई है... आपको बता दें कि इस प्याज मंडी से देश के बड़े हिस्से में प्याज की सप्लाई होती है...लेकिन हड़ताल ने इस सप्लाई को पूरी तरह ठप्प कर दिया है...जिससे आने वाले दिनों में प्याज की किल्लत होगी..और इसके दाम और भी बढ़ सकते हैं।
इतना ही नही संकेत ये भी मिल रहे हैं कि रेल बजट में इस बार 10 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी की जा सकती है। रेल मंत्री सदानंद गौड़ा का कहना है कि रेलवे की मौजूदा हालत के मुताबिक किराए में बढ़ोत्तरी समय की मांग है। गौरतलब कि नई सरकार बहुत जल्द बजट पेश करने वाली है..ऐसे में कभी भी रेलवे के किराए में बढ़ोतरी हो सकती है। लिहाजा यहां भी जनता को महंगाई की एक और मार झेलने के लिए..तैयार रहना होगा। आपको बता दें कि पिछले बजट में भी तत्कालीन सरकार ने ईंधन में महंगाई और रेलवे के घाटे का रोना-रोकर... किराए में बढ़ोतरी की थी... ऐसे में अगर मौजूदा सरकार दोबारा दाम बढ़ाती है..तो रेलवे से सस्ते सफर की उम्मीद नहीं की जा सकती।
इसके अलावा आशंका ये भी है कि जल्द ही डीजल और पेट्रोल की कीमते भी बढ़ सकती हैं। जी हां इराक संकट के चलते अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल की कीमत 106 से 113 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। इराक के बुरे हालात के चलते अगर आपूर्ति प्रभावित हुई तो यहां पेट्रोल-डीजल सामान्‍य से ज्‍यादा महंगा हो सकता है। बहुत मुमकिन है कि डीज़ल-पैट्रोल के महंगा होने से...ना सिर्फ मिडिल और हाई क्लास पर इसका असर पड़ेगा। बल्कि पब्लिक ट्रांसप्रोट में सफर करने वाला गरीब तबका भी इससे बुरी तरफ प्रभावित होगा। जाहिर है कि अगर पेट्रोल-डीजल महंगे हुए तो बसों, ट्रकों और टैक्सियों के किराए में भी बढ़ोतरी होगी...साथ ही जनता पर महंगाई की चौतरफा मार भी पड़ेगी।
मोदी पहले ही ये कह चुके हैं कि देश को कुछ कड़े फैसलों के लिए तैयार रहना होगा, लेकिन रेल किराया बढ़ाने और सब्सिडी खत्म करने जैसे फैसले लिए गए तो महंगाई और बढ़ जाएगी। ऐसे में मोदी का अर्थशास्त्र जनता के कितना समझ आएगा फिलहाल कहना मुश्किल है। 
महंगाई एक ऐसा मुद्दा है..जिससे देश के हर खास-ओ-आम पर असर पड़ेगा..फिर चाहे वो गरीब हो या अमीर.. लिहाजा सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

विजय कुमार राय