Friday, 6 June 2014

नई लोकसभा, नए रिकॉर्ड

 16वीं लोकसभा की तस्वीर...नई लोकसभा में कैसे हैं आपको 543 सांसद... किसमें क्या कुछ खास..और किसकी छवि पर लगे हैं कितने दाग
देश की नई लोकसभा तैयार हो गई है... 543 सांसद जनता पर अपना जलवा दिखाकर...ससंद तक पहुंचने में कामयाब रहे...ये सभी सांसद अपनी-अपनी खूबियों और खामियों के साथ लोकसभा तक पहुंच गए। हर बार की तरह इस बार भी लोकसभा में कई पुराने रिकॉर्ड टूटे..और कई नए रिकॉर्ड बने...अगर बात की जाए दागियों की...तो इस बार संसद में हर तीसरा चेहरा..दागदार छवि वाला होगा। जी हां आप भी देखिए...आपकी सरकार में कितने दागी।


तो देखा आपने कितने दागी... परचम लहराने में कामयाब रहे..खैर बढ़ते हैं आगे और बात करते हैं करोड़पति सांसदों की... शायद आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि नई लोकसभा के सभी सांसदों के पास... कुल 6,500 करोड़ रुपये की संपत्ति है...जो पिछली बार के मुकाबले काफी ज्यादा है। अगर यकीन नहीं होता
इस बार की लोकसभ में बीजेपी ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए...नई लोकसभा में सबसे ज्यादा सांसद बीजेपी के हैं...इसके अलावा सबसे ज्यादा दागी, सबसे अमीर और सबसे गरीब सांसद का रिकॉर्ड भी बीजेपी के ही नाम रहा...चलिए आपको दिखाते हैं सबसे उम्रदराज़...और रिटायर्ड सेना प्रमुख को जीत दिलाकर... कैसे बीजेपी ने कुछ और नए रिकॉर्ड अपने नाम किए।
जी हां संसद में महिलाओं की 11 फीसदी भागीदारी और 70 पर्सेंट एजूकेटेड सांसदों के साथ...नई लोकसभा में और भी कई रिकॉर्ड कायम हुए... फिलहाल यहां लेंगे एक छोटा सा ब्रेक.. ब्रेक के बाद जल्द हाजिर होंगे...और आपको दिखाएंगे... कैसे बना लोकसभा में सबसे कम मुस्लिम सांसदों का नया रिकॉर्ड.
16वीं लोकसभा की... उन सांसदों की जो इस बार लोकसभा तक पहुंचने में कामयाब रहे... मोदी लहर में देश का राजनीतिक नक्शा सा बदला कि उत्तर प्रदेश समेत 27 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में से... एक भी मुस्लिम उम्मीदवार लोकसभा नहीं पहुंच सका...जी हां आजादी के बाद ये पहला आम चुनाव है, जब लोकसभा में सबसे ज्यादा 80 सांसद भेजने वाले उत्तर प्रदेश से एक भी मुस्लिम संसद नही पहुंचा... जबकि इस राज्य की कुल आबादी में मुस्लिम समुदाय का हिस्सा 18 फीसदी है।
नई सरकार ने संसद में तो कई रिकॉर्ड दर्ज कर लिए... उम्मीद करते हैं कि जनता की कसौटी पर भी नई सरकार खरी उतरने में कामयाब रहे...

16वीं लोकसभा के सांसद
34 फीसदी सांसद दागी
186 सांसदों पर क्रिमिनल केस
हर तीसरे MP की दागदार छवि
चुनाव से पहले भले ही क्रिमिनल बैकग्राउंड के लोगों को संसद से दूर रखने की बात जोर-शोर से उठी थी, लेकिन इसका कोई असर देखने को नहीं मिला। नई लोकसभा में हर तीसरा सांसद आपराधिक मामलों में आरोपी होगा। जी हां चुनाव जीत कर आए 541 सांसदों में से 186 के खिलाफ कोई न कोई आपराधिक केस दर्ज है। आपको बता दें कि पिछली लोकसभा में ऐसे सांसदों की संख्या 158 थी। जबकि नई लोकसभा में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सांसदों की संख्या बढ़ गई है।


इस बात का खुलासा सांसदों ने जो शपथ पत्र भरे हैं.. उनके आधार पर हुआ है... नेशनल इलेक्शन वाच यानी एनईडब्ल्यू और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स यानी एडीआर ने 543 में 541 सदस्यों के शपथ पत्र के विश्लेषण के आधार पर कहा...कि 34 फीसदी चुने गए सांसदों ने अपने शपथ पत्र में खुलासा किया है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं...संसद में इन सांसदों की कुल संख्या 186 है। चौंकिए नहीं...ये हकीकत है कि नई लोकसभा में हर तीसरा नवनिर्वाचित सांसद आपराधिक पृष्ठभूमि वाला है।


2009 में 30 फीसदी लोकसभा सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे... इस बार इनमें चार फीसदी की बढ़ोतरी हुई है...2014 के चुनाव में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले एक प्रत्याशी के जीतने की संभावना 13 फीसदी रही, जबकि साफ छवि के प्रत्याशियों के जीतने की संभावना सिर्फ पांच फीसदी थी।
इस बार चुने गए क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले 186 सांसदों में से 112 ने अपने खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, सांप्रदायिक सौहार्द  बिगाड़ने, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर  मामले होने की घोषणा की है...चुनाव सुधार की दिशा में काम करने वाली संस्था एसोसिएशन ऑफ डेमॉक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक...सबसे ज्यादा दागी सांसद बीजेपी के हैं। बीजेपी के कुल 281 सदस्यों में से 98 ने अपने शपथ पत्र में आपराधिक मामले दर्ज होने की घोषणा की है...कांग्रेस के 44 में से 8, एआईएडीएमके के 37 में से 6, शिवसेना के 18 में से 15 और तृणमूल के 34 विजेताओं में से 7 ने आपराधिक मामले दर्ज होने का खुलासा किया है.... 



किस पार्टी से कितने दागी
पार्टी            कुल सांसद        दागी सांसद
बीजेपी            281                            98
कांग्रेस             44                             08
एआईएडीएमके       37                            06
शिवसेना            18                            15
तृणमूल कांग्रेस       34                           07

हैरत की बात तो ये है कि इस बार दागी नेताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी भूमिका काफी सख्त रही... इसके अलावा पार्टियां भी दागियों को चुनावी मैदान से दूर रखने के दावे कर रही थीं... लेकिन राजनीतिक दलों को इस बात का बखूबी एहसास था कि बिना दागियों के उनकी नैया भंवर से पार लगने वाली नहीं..यही वजह है कि चुनाव नज़दीक आते-आते पार्टियां अपने इरादों से पलटती दिखाई दीं..और सभी दलों से दागियों को खूब टिकट बांटे... नतीजा आप के सामने है... नई संसद में हर तीसरा चेहरा दागदार छवि वाला होगा।
नए सांसदों का रिपोर्ट-कार्ड
करोड़पतियों की बढ़ी संख्या
543 में से 442 करोड़पति
300 करोड़पति थे पिछली बार
लोकसभा में करोड़पति सांसदों की संख्या भी बढ़ी है। नई लोकसभा में कुल 442 करोड़पति हैं और इसमें भी भारतीय जनता पार्टी ने बाजी मार ली है... बीजेपी के 237 सदस्य करोड़पति हैं जबकि तेलुगु देशम पार्टी दूसरे नंबर पर है...कांग्रेस के 35 सदस्य करोड़पति हैं जबकि अन्नाद्रमुक के 29 और तृणमूल कांग्रेस के 21 सदस्य करोड़पति हैं. ये आंकड़े भी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने जारी किए हैं।

किस पार्टी में कितने करोड़पति 
पार्टी                करोड़पति
बीजेपी                237
कांग्रेस                 35
अन्नाद्रमुक             29
तृणमूल कांग्रेस          21
GFX OUT
अमीर सांसदों में बीजेपी के 237 और कांग्रेस के 35 सांसद करोड़पति हैं. अमीर सांसदों में नंबर 1 पर जयदेव गल्ला हैं, जिनकी घोषित संपत्ति 683 करोड़ रुपये है। गल्ला आंध्र प्रदेश के गुंटूर से टीडीपी के एमपी हैं। दूसरे नंबर पर 528 करोड़ की दौलत के साथ के. विशेश्वर रेड्डी हैं। रेड्डी टीआरएस के सांसद हैं। तीसरा नंबर आंध्रप्रदेश के नारसापुरम से बीजेपी सांसद गंगे राजू का है। गंगे राजू की कुल संपत्ति 288 करोड़ रुपये हैं...यानी इस बार संसद में करोड़पति सांसदों की भी भारी भरकम संख्या देखने को मिल रही है। 
सबसे अमीर सांसद कौन 
जयदेव गल्ला
पार्टी - टीडीपी
गुंटूर से सांसद
कुल संपत्ति - 683 करोड़
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के. विशेश्वर रेड्डी
पार्टी - टीआरएस
चेवेला से सांसद
कुल संपत्ति - 528 करोड़
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गंगे राजू
पार्टी - बीजेपी
नरसापुरम से सांसद
कुल संपत्ति - 288 करोड़

नई लोकसभा के सभी सांसदों के पास कुल 6,500 करोड़ रुपये की संपत्ति है... करोड़पति सांसदों को लेकर तो बीजेपी अव्वल नबंर पर है ही.. गरीब सांसदों के मामले में भी बीजेपी ही सबसे ऊपर है। इस बार लोकसभा में आए सबसे गरीब सांसदों में सीकर से बीजेपी के लिए चुने गए सुमेधानंद सरस्वती हैं.. इनके पास महज़ 34,311 रुपये की संपत्ति है..इसके अलावा बीजेपी के ही अल्वर से चुने गए... महंत चंद नाथ योगी भी सबसे गरीब सांसदों में से एक हैं... योगी के पास कुल 1,99 लाख रुपये की संपत्ति है
सबसे गरीब सांसद कौन
सुमेधानंद सरस्वती
पार्टी - बीजेपी
सीकर से सांसद
कुल संपत्ति - 34,311 रुपये
-----------------
महंत चंद नाथ योगी
पार्टी - बीजेपी
अलवर से सांसद
कुल संपत्ति - 1.99 लाख रुपये

भले ही राजनीति में दौलतमंदों का सिक्का चलता हो..लेकिन आज भी ऐसे नेता हैं..जो महज़ कुछ हजार रुपये की संपत्ति के मालिक हैं...बावजूद इसके उन्होंने चुनाव में शानदार जीत हासिल की..और एक मिसाल बन कर लोकसभा पहुंचे। 

16वीं लोकसभा के माननीय
महिलाओं की बढ़ी भागीदारी
11 फीसदी महिला सांसद
उम्रदराजों ने भी मारी बाजी
16वीं लोकसभा के लिए चुने गए सांसदों की प्रोफाइल पर अगर गौर किया जाए..तो एक और दिलचस्प बात सामने आती है.. वो ये है कि इस बार की लोकसभा...अब तक की सबसे उम्रदराज़ लोकसभा होगी...इस बार चुने गए कुल सांसदों में... 47 फीसदी सांसद 55 साल से ज्यादा उम्र के हैं। जबकि पिछली लोकसभा में इस उम्र के सांसदों की संख्या कुल 43 फीसदी ही थी...इस बार लोकसभा में कुल 13 फीसदी यानी 71 सांसद ही 40 साल से कम उम्र के है... वहीं 24 से 40 साल के बीच के 13 फीसदी सांसद चुने गए हैं... इसके अलावा 71 साल से 100 साल के आयुवर्ग वाले 7 फीसदी सांसद लोकसभा तक पहुंचे...इनमें सबसे उम्रदराज बीजेपी के लालकृष्ण आडवाणी हैं..89 साल के आडवाणी गांधीनगर सीट से सांसद चुने गए हैं।
कौन कितना उम्रदराज़
आयुवर्ग            सांसदों की संख्या
55-70 साल            47 फीसदी
24-40 साल            13 फीसदी
71-100 साल           07 फीसदी
चौंकाने वाली बात तो ये है कि...चुनाव से पहले सभी पार्टियों ने यूथ फेक्टर पर जम कर फोकस किया था.. और युवाओं को बढ़-चढ़कर मौका दिया... इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इस बार..देश की सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी बीजेपी में चुनाव से ठीक पहले बुजुर्ग नेताओं ने खूब बगावत की..और पार्टी ने भी इनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। इस बार की लोकसभा में...पहली बार संसद में कोई पूर्व सेना प्रमुख जीत कर पहुंचे हैं.. जी हां बिना किसी राजनैतिक बैकग्राउंड के... पहली ही बार में इतनी शानदार जीत हासिल करने वाले जनरल वी.के.सिंह इतिहास रचने में कामयाब हुए।
16वीं लोकसभा के ब्लूप्रिंट पर अगर नज़र डाली जाए...तो पता लगता है कि राजनीति और सामाजिक सेवा में पूरी तरह एक्टिव कुल 24 फीसदी नेता ही संसद तक पहुंचे...जबकि 20 फीसदी बिजनेस मैन्स ने बाजी मारी...कृषि जगत से जुड़े 27 फीसदी लोग संसद पहुंचे... इसके अलावा 7 फीसदी वकील...4 फीसदी शिक्षक....3 फीसदी कलाकार...4 फीसदी डॉक्टर...1 फीसदी पत्रकार..और 2 फीसदी सिविल,पुलिस और सेना से रिटायर्ड लोग संसद तक पहुंचने में कामयाब रहे। इन सबके अलावा अन्य क्षेत्रों से 6 फीसदी नेता संसद तक पहुंचे। 

किस प्रोफेशन से कितने सांसद
राजनीति/ सामाजिक सेवा        24 फीसदी
बिजनेस                      20 फीसदी
कृषि                         27 फीसदी
वकील                        07 फीसदी
शिक्षक                       04 फीसदी
कलाकार                      03 फीसदी
डॉक्टर                       04 फीसदी
पत्रकार                       01 फीसदी
सिविल/ पुलिस/ सेना             02 फीसदी
अन्य                         06 फीसदी
इस बार की नई लोकसभा ने कई रिकॉर्ड बनाए... जिनमें एक ये भी है कि इस बार संसद में महिलाओं की भागीदारी 11 फीसदी हो गई हैइस बार लोकसभा में पुरुष महिला अनुपात... 89:11 है। यानी हर 100 में से 89 पुरुष सांसद हैं तो 11 महिला सांसद हैं।


इस बार लोकसभा पहुंचे सांसदों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि पर गौर किया जाए तो 70 फीसदी ग्रेजुएट या उससे ज्यादा बढ़े-लिखे नेताओं ने सरकार बनाने में भागीदागी निभाई... इस बार संसद में 41 फीसदी सांसद ग्रेजुएट हैं...जबकि 28 फीसदी पोस्ट ग्रेजुएट हैं... महज़ 10 फीसदी सांसद हाई स्कूल पास है...और 13 फीसदी हाई स्कूल से भी कम पढ़े हुए हैं... इन आंकड़ों में 2 फीसदी सांसदों की शिक्षा के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है।

सांसदों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि
ग्रेजुएट                41 फीसदी
पोस्ट ग्रेजुएट           28 फीसदी
हाई स्कूल             10 फीसदी
हाई स्कूल से कम       13 फीसदी
जानकारी नहीं          02 फीसदी


हालांकि सांसद बनने के लिए शिक्षा का कोई स्तर निर्धारित नहीं किया गया है... बावजूद इसके संसद में 70 फीसदी सांसदों का ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट होना...देश में बढ़ते शिक्षा के स्तर की बानगी बयां करने के लिए काफी है।

आजादी के बाद पहली बार
मुस्लिम सांसदों को लेकर
बदली लोकसभा की तस्वीर
देश की सबसे बड़ी दूसरी आबादी मुस्लिम है... 2011 के आंकड़ों के मुताबिक मुस्लिमों की संख्या.. देश की कुल आबादी का 15 फीसदी है... लेकिन देश की सबसे बड़ी पंचायत में इस आबादी का प्रतिनिधित्व इस बार... महज़ 3.5 फीसदी ही रह गया है। संसद में मुस्लिम सांसदों की संख्या हर बार घट रह रही है। जहां 2004 के लोकसभा चुनाव में 34 मुस्लिम प्रत्याशी जीत हासिल कर संसद पहुंचे थे, वहीं 2009 में ये आकंड़ा घट कर मात्र 28 रह गया। लेकिन इस बार संसद में मुस्लिम सांसदों की भागीदारी... बेहद कम हो गई है...जी हां इस बार लोकसभा में सिर्फ 22 मुस्लिम सांसद...चुने गए हैं। 


आजादी के बाद इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, कि 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में कोई भी मुस्लिम प्रत्याशी जीत हासिल नहीं कर पाया। जबकि इस राज्य से लोकसभा में मुस्लिम सांसदों की अच्छी खासी भागीदारी हुआ करती थी...इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि....देश भर में 282 सीटें जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी में...एक भी प्रतिनिधि मुस्लिम कम्यूनिटी से नहीं है। जिन चुनिंदा मुस्लिम प्रत्याशियों को बीजेपी ने टिकट दिए थे... उन्हें जनता ने नकार दिया।
आपको बता दें कि देश के लोकसभा चुनाव में 21 राज्यों और छह केंद्र शासित प्रदेशों से एक भी मुस्लिम प्रत्याशी ने जीत हासिल नहीं की। पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा सात मुस्लिम प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की, वहीं दूसरे नंबर पर बिहार है, जहां से चार मुस्लिम प्रत्याशियों ने चुनाव जीता, जम्मू-कश्मीर और केरल से तीन-तीन मुस्लिम प्रत्याशी लोकसभा तक पहुंचने में कामयाब रहे..तो असम से दो मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की...वहीं आंध्रप्रदेश, लक्षद्वीप और तमिलनाडु से भी एक-एक मुस्लिम कैंडीडेट मोर्चा मारने में कामयाब रहे। 

लोकसभा में किसने मुस्लिम सांसद 
पश्चिम बंगाल            07
बिहार                   04
जम्मू-कश्मीर             03
केरल                   03
असम                   02
आंध्रप्रदेश                01
लक्षद्वीप                01
तमिलनाडु               01


देश में मुस्लिमों की भारी भरकम आबादी के बावजूद कई राज्यों से एक भी मुस्लिम प्रत्याशी संसद तक पहुंचने में कामयाब नहीं हुआ। राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे मुस्लिमों की अच्छी खासी आबादी वाले राज्यों में भी मुस्लिम उम्मीदवाद वोटरों पर जादू दिखाने में नाकाम साबित हुए।