Friday, 6 June 2014

भरतीयों का विदेशों में जलवा

विदेशों में भी भारत के हुनर की कद्र की जाती है.... भारतीयों ने प्रतिभा, कड़ी मेहनत और कामयाबी की जो मिसाल कायम की है...दुनियाभर में उसके कद्रदान हैं....विदेशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों में... नौकरियों के क्षेत्र में भारतीयों का एक अलग रुतबा है... और ऊंचा मकाम है.... जी हां यही वजह है कि बड़ी-बड़ी एमएनसी कंपनियों... अपनी डूबती नैया को बचाने के लिए भारतीयों को अप्रोच कर रही है। चाहे माइक्रोसोफ्ट हो, पेप्सी हो... या फिर कोई और कंपनी...आज भारतीयों के हाथों में है इन नामी कंपनियों की डोर। इतना ही नहीं अब को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी भरतीयों की काबिलियत के मुरीद हो गए हैं।
भारतवंशी को यूएस में अहम पद
ओबामा ने माना शेफाली का लोहा
यूएस होलोकास्ट की बनाई मेंबर
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारतीय मूल की एक टॉप फंड रेजर को...यूएस होलोकास्ट मेमोरियल काउंसिल का मेंबर नियुक्त किया है। कैलिफॉर्निया निवासी शेफाली राजदान दुग्गल ने 2008 और 2012 दोनों ही राष्ट्रपति चुनावों में.... ओबामा को करोड़ों डॉलर की रकम धनराशि इकट्ठा करने में मदद की। ओबामा ने भी शेफाली का लग्न, मेहनत, इच्छा शक्ति और ईमानदारी को देखते हुए उन्हें अहम पद देने की घोषण की...जिसके बाद शेफाली को यूएस होलोकास्ट मेमोरियल काउंसिल की सदस्य नियुक्त किया गया है।
ओबामा को भारतीयों से उम्मीदें
इसके साथ ही ओबामा ने कई दूसरे भारतीय को दूतावासों और प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति करने की भी घोषणा की है... ओबामा ने भारतीयों पर भरोसा जताते हुए कहा कि ये लोग अपनी नई भूमिकाओं में जो काम करेंगे उससे अमेरिकियों की काफी सेवा होगी। मैं बहुत आभारी हूं कि उन्होंने इस प्रशासन में काम करने की सहमति जताई है और मैं उनके साथ आने वाले सालों में काम करने को लेकर उत्सुक हूं।

पको बता दें कि यूएस होलोकास्ट मेमोरियल काउंसिल की स्थापना कांग्रेस ने 1980 में की थी.. ताकि यूएस होलोकास्ट मेमोरियल म्यूजियम को बनाने के लिए रकम जमा की जा सके। इस काउंसिल की एक साल में दो बार बैठकें होती हैं। 

अमेरिका में बजा
भारतीयों का डंका
GFX OUT
अमेरिका में भारतवंशियों का डंका बजने लगा है। एक जानकारी के मुताबिक इस वक्त अमेरिका में ओबामा प्रशासन में 50 से ज्यादा भारतवंशी शीर्ष पदों पर काम कर रहे हैं। अकेले व्हाइट हाउस में एक दर्जन से ज्यादा भारतवंशी अलग-अलग पदों पर काम कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अमेरिका में शायद ही कोई ऐसा सरकारी विभाग होगा.... जहां भारतीय काम न करते हों। हालांकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था...लेकिन ओबामा प्रशासन में भारतीयों को कुछ ज्यादा ही तरजीह मिल रही है। यूएसएड के प्रशासक राजीव शाह.. ओबामा प्रशासन में सबसे ऊंचे पद पर तैनात.. भारतवंशी हैं...फिलहाल ये अमेरिकी ही हैं...लेकिन मूल रूप से शाह भारत की पैदाइश हैं। 2013 में निशा बिस्वाल को दक्षिण एशियाई मामलों के लिए सहायक विदेश मंत्री नियुक्त किया गया था। पिछले ही दिनों यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूसटन की कुलपति रेणु खाटर को फेडरल रिजर्व बैंक की डलास शाखा का उपाध्यक्ष बनाया गया है। गौरतलब है कि इस वक्त अमेरिका में करीब 30 लाख भारतवंशी रह 
अमेरिकी एजेंसी नासा में
भारतीयों की भरमार
भारतीयों की योग्यता और क्षमता दूसरे देश के लोगों से काफी ज्यादा है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा में काम करने वाले लोगों में भारतीयों की संख्या 36 फीसदी है। इसी तरह अमेरिका में चिकित्सा क्षेत्र में भी भारतीयों की अच्छी खासी-संख्या है।...अमेरिका में काम करने वाले डॉक्टरों में से 38 फीसदी भारतीय हैं। जबकि वैज्ञानिकों में 12 फीसदी भारतीय हैं। अमेरिका-भारत वाणिज्य मंडल के मुताबिक कम्प्यूटर क्रांति लाने वाली कंपनी माइक्रोसॉफ्ट में भारतीयों का आँकड़ा 34 प्रतिशत है। इसी तरह आईबीएम के 28 प्रतिशत और इंटेल के 17 प्रतिशत कर्मी भारतीय हैं। 

अमेरिका में छाए भारतीय 
डॉक्टर                38 %
वैज्ञानिक              12 %
माइक्रोसॉफ्ट           34 %  
आईबीएम             28 %
इंटेल                 17 %

विदेशों में रहने वाले भारतीय अपने तेज़ दिमाग, समर्पण और कठिन मेहनत के सहारे बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना करने को तैयार रहते हैं। चाहे आईटी क्षेत्र हो या दवा,.. बैंकिंग सेक्टर हो या इनवेस्टमेंट सेक्टर....इंजीनियरिंग और निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी भीरतीयों ने मिसाल प्रदर्शन किया है.... विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात ये मानी है कि उन्होंने अपने मूल देश के साथ... अपने भावनात्मक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक लिंक को भी बरकरार रखा है।

ग्लोबल ब्रांड्स पर राज कर रहे भारतीयों की लिस्ट में सत्या नडेला सबसे नया नाम है। मौजूदा दौर में भारत के छोटे छोटे शहरों से निकली ढेरों प्रतिभाएं दुनिया की दिग्गज कंपनियों पर राज़ कर रही हैं... दुनिया भर की कंपनियों में भारतीय लोगों की अलग अहमियत बन गई है। सबसे खास बात तो ये है कि इनमें से कई चेहरे ऐसे हैं जो इमर्जिंग इंडिया...यानी देश के कम विकसित इलाकों से संबंध रखते हैं और सबसे युवा देश के तौर पर भारत के चमत्कार की तस्वीर पेश करते हैं।

भारत के अव्वल चेहरे

सत्या नडेला को माइक्रोसॉफ्ट का नया सीईओ बनाया गया है।
चेन्नई की रहने वाली इंदिरा नूई पेप्सिको की सीईओ हैं।
बिहार के मधुबनी के संजय झा ग्लोबल फाउंड्रीज के सीईओ हैं।
नागपुर के रहने वाले विक्रम पंडित सिटी ग्रुप के सीईओ रह चुके हैं।
आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई करने वाले अजीत जैन बर्कशायर हैथवे के रीइंश्योरेंस ऑपरेशंस हेड हैं।
पुणे के अजय बंगा मास्टर कार्ड के सीईओ हैं।
मध्यप्रदेश के रहने वाले राकेश सिग्मा एल्ड्रिक के सीईओ हैं।
एक और भारतीय फ्रांसिस्को डिसूजा कॉग्निजेंट के सीईओ हैं।
पुणे के अभिजीत तलवलकर एलएसआई कॉरपोरेशन के सीईओ हैं।
आगरा के दिनेश सी पालीवाल हरमैन इंटरनेशनल के सीईओ हैं।
बरेली के राकेश कपूर रेकिट बेंकाइज़र के सीईओ हैं।
बीएचयू से पढ़ाई करने वाले निकेश अरोड़ा गूगल में सीनियर वीपी और चीफ बिजनेस ऑफिसर के पद पर हैं।
दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से पढ़ाई करने वाली अंशु जैन डॉएश बैंक में को-सीईओ हैं।
दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज और आईआईएम अहमदाबाद के छात्र रहे इवान मेनेजेस डियाजियो के सीईओ हैं।
सेंट स्टीफेंस कॉलेज और आईआईएम अहमदाबाद के एक और छात्र पीयूष गुप्ता डीबीएस ग्रुप होल्डिंग्स में सीईओ हैं।
संजय महरोत्रा टैक्नोलॉजी में जानी मानी कंपनी सैनडिस्क के सीईओ हैं।
दिल्ली के राजीव वासुदेव एगॉन जेंडर के सीईओ हैं।


ये वो खास नाम हैं..जिन्होंने देश और विदेश में भारत का गौरव बढ़ाया है... लगन और मेहनत के दम पर इन लोगों ने दुनिया भर में भारत का लोहा मनवाया है। भले ही भारत एक विकासशील देश हो..लेकिन विकसित देशों की बड़ी कंपनियों की डोर...आज भी होनहार भारतीयों के हाथों में ही है।