Tuesday, 6 May 2014

उफ! ये गर्मी...

रिपोर्ट- विजय कुमार राय
पारा बढ़ रहा है... और इसी के साथ गरमी अपना सितम दिखाने लगी है.. लोग हलकान हैं... ये मंजर गरमियों की शुरूआत का है..जबकि तपती गर्मी का मौसम आना अभी बाकी है। सूरज की किरणें आंगारों की तरह.. लोगों को झुलसा रही हैं... आलम ये है कि सुबह की धूप भी सहन नहीं होती... जबकि दोपहर के वक्त सड़कों पर निकलना... धधकती भट्टी में उतरने जैसा है। मौसम की तल्खी के बीच काम करने की मजबूरी में लोग ना चाहते हुए भी... घरों से निकलने को मजबूर हैं।
कई जगहों पर तो गर्मी ने पुराने रिकॉर्ड भी तोड़ दिए हैं। जबकि आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ने के आसार हैं। मौसम विभाग की मानें तो अभी दिन ब दिन पारा और चढ़ेगा...अभी गर्मी से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं....आने वाले महीनों में गर्मी और सताएगी।
दिल्ली में गर्मी का प्रकोप बढ़ने लगा है.... दोपहर के वक्त स्कूल से लौटते बच्चे.. तेज धूप औऱ गर्म हवाओं के थपेड़े सहने को मजबूर हैं। दुपहिया वाहनों पर सफर करने वाले लोग मुंह पर कपड़ा बांध कर... चल रह हैं.. वहीं पैदल यात्री छाते का सहारा लेकर... सड़कों पर निकलने की हिम्मत जुटाते हैं... सड़कें आग उगलने लगी हैं... और ट्रैफिक घुटन पैदा कर रहा है। मैदानी इलाकों में लोग गर्मी से बेहाल हैं... जबकि पहाड़ी इलाकों में भी गर्मी का बुरा हाल है। गर्मी के इस मौसम में बिमारियां और संक्रमण का खतरा भी बढ़ने लगा है...
हफ्ते दस दिन के अंतराल पर होने वाली बारिश... मौसम के मिजाज को और ज्यादा बिगाड़ रही है। बारिश की ठंडक और सूरज की गर्मी की कॉकटेल मिल कर... लोगों को बीमार कर रही हैं। साइनस, स्वाइन फ्लू, मलेरिया और वायरल जैसी बीमांरियां जनता को चपेट में ले रही हैं। अस्पतालों में मरीजों की तादाद बढ़ने लगी है। बुखार और नज़ले के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है।
रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर यात्री गर्मी से परेशान हैं। ठंडे इलाकों से दिल्ली पहुंचे लोग.... गर्मी में बिलख रहे हैं... इंसान ही नहीं जानवरों पर भी गर्मी का असर साफ देखा जा सकता है। ऐसे में पानी और बर्फ और कोल्ड ड्रिंक्स की बिक्री काफी बढ़ गई है।
 देश भर में गर्मी का बुरा हाल है.... चारों तरफ हाहाकार मचा है... चाहे मैदानी इलाकों की बात हो या फिर पहाड़ों की.,... हर तरफ गर्मी अपना असर दिखा रही है। चलिए आपको भी दिखाते देश भर में तपती गर्मी की अलग-अलग तस्वीरें। उत्तराखंड में गर्मी से बुरा हाल है... जो लोग गर्मी से निजात पाने के लिए... मैदानी इलाकों से पहाड़ों की तरफ दौड़ते हैं... वो इन तस्वीरों को जरूर देख लें... क्योंकि इस बार पहाड़ों पर भी गर्मी से राहत मिलने वाली नहीं है। पहाड़ों पर गर्मियों का इतना बुरा हाल है कि...यहां यहां सड़कें तप रही हैं..जो पर्यटक दूर से यहां ठंडक का मज़ा लेने आए थे...उन्हें निराशा झेलनी पड़ रही है... कई नदियां और नहरें सूख चुकी हैं।पहाड़ों की ऊंची चोटियों पर थोड़ी राहत जरूर है... मगर थोड़ा नीचे गर्मी से बचने के लिए... लोग नदियों में नहा रहे हैं... उधर तपती धूम के चलतेग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। जिससे कई नदियों का जलस्तर काफी बढ़ गया है। पंजाब की सर्दी जितना लोगों को ठिठुराती है...उससे कहीं ज्यादा यहां की गर्मी जनता को जला रही है... जी हां पंजाब में गर्मी से इतना बुरा हाल है कि लोग सिर्फ ठंडी चीज़ों को तवज्जो दे रहे हैं... लस्सी और जूस की ब्रिकी बढ़ गई हैं...वहीं सड़कें आग उगल रही हैं... आलम ये है कि पेड़ों के नीचे भी लोगों को राहत नहीं मिल रही...। सूरज की जलाने वाली किरणें मुसाफिरों पर मुसीबत बन कर गिर रही हैं।
ये तस्वीरें हैं हरियाणा के भिवानी की... जहां इन दिनों लू अपना प्रकोप दिखा रही है... गर्मी से तो बचना मुमकिन है..लेकिन लू के थपेड़ों ने लोगों को और बेहाल कर दिया है। स्कूली बच्चों को देख कर तो लगता है कि जैसे... बेचारों को पढ़ाई की सज़ा मिल रही है.. दोपहर के वक्त चिलचिलाती धूप में...स्कूल से निकले बच्चों को घर तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ये बेचारे रास्ते में रुकते-रुकातेआईस क्रीम,जूस और लस्सी पीते हुए घर पहुंचते हैं। चूंकि तरबूज में पानी की भरपूर मात्रा है..और इसकी गिनती ठंडे फलों में होती है...लिहाजा तरबूज़ की डिमांड भी काफी बढ़ गई है।


गर्मी में झुलसा ओडिशा

गर्मी में बारिश पड़ जाए.. तो मानो लोगों को नई जिंदगी मिल जाती है... लेकिन इस गर्म मौसम में अगर कहीं आग लग जाए...तो जान बचाना भी मुश्किल हो जाए.. लेकिन ओडिशा में गर्मी का क्या हाल है...इसका सबूत है जंगल में लगी ये आग... भीषण गर्मी के चलतेयहां बालीगुड़ाफूलबानी और कंधमाल के जंगलों में आग लग गई...जिससे कितने ही जंगली जीवों के आशियाने और जिंदगियां उजड़ गईं। इंसान तो इंसान जानवर भी इस गर्मी से हार रहे हैं। किसानों की हालत खराब है... फसलें सूख रही हैं,... प्यासी धरती में दरारें पड़ने लगीं हैं... वहीं शहरी आबादी पानी के लिए तरस रही है...लोग पानी की किल्लत से इस कदर जूझ रहे हैं.. कि उन्हें कासों दूर से पानी ढोना पड़ रहा है। कुछ लोग तो नाली का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं.... ये तस्वीरें आपको विचलित कर सकती हैं..लेकिन हकीकत यही है..कि मरता क्या नहीं करता... जब प्यास के मारे गला सूखने लगा..तो गंदे पानी को ही अमृत समझ कर पी लिया। सूखे नलों और तालाबों के इर्द-गिर्द सन्नाटा पसरा हुआ है। गर्मी और लू से तड़पते मुसाफिर बीच रास्ते में जूसगन्ने का रस और नारियल पानी का सहारा ले रहे हैं।
आम तौर पर नॉर्थ ईस्ट का तापमान ठंडा रहता है...लेकिन इस बार गर्मियों की मार के आगे...यहां भी लोगों के पसीने छूट रहे हैं... सड़कों पर दोपहर के वक्त सन्नाटा पसरने लगता है.... जिसे देखो वहीं छांव की तरफ दौड़ता नज़र आता है... लोग इस भीषण गर्मी में घरों से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। गर्मी की वजह से बाजारों की रौनक फीकी पड़ चुकी है। हर किसी को बारिश की आस है... कि कब मानसून आए...और उन्हें इस जलाती गर्मी से निजात दिलाए। यहां भी लोग चटपटेमसालेदार और तैलीय भोजन को छोड़कर ठंडे खाद्य प्रदार्थों की तरफ ज्यादा भाग रहे हैं। जूसलस्सी और नारियल पानी की यहां भी धड़ल्ले से ब्रिकी हो रही है।
मध्यप्रदेश की गर्मी तो पहले से ही मशहूर है... ठंड के महीनों में भी यहां गर्मी अपना असर दिखाती रहती है...अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि इन दिनों में यहां क्या हालत होगी। मध्यप्रदेश और विदर्भ में गर्मी का इतना बुरा हाल है कि लोग... घरों से बाहर निकलने में भी कतरा रहे हैं.. वहीं जो लोग सड़कों पर निकलने की हिम्म्त जुटाते हैं...वो भी पूरे इंतजाम के साथ निकलते हैं। जहां भी नज़र जाती है...वहीं मुंह पर तौलिया.. सिर पर गमछा..और आँखों पर काला चश्मा लगाए लोग दिखाई देते हैं। गर्मी का यहां क्या आलम है...इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है कि यहां सुबह 10 से 11 बजे के आसपास... तापमान 41 तक पहुंच जाता है।
बिना बारिश मानसून
सूखे की बढ़ी आशंका
इस बार मानसून तो आएगा..लेकिन बारिश नहीं लाएगा... हरियाली की जगह सूखा लाएगा.... रिमझिम फुहारों के बदले...मिलेंगे लू के थपेड़े... जी हां ये बात हम नहीं कह रहे..बल्कि इस बात का खुलासा हुआ है.. मौसम विभाग की एक रिपोर्ट में...रिपोर्ट के मुताबित इस साल मानसून सीज़न में औसत से कम बारिश का अनुमान है। खास तौर पर उत्तर-पश्चिमी और पश्चिमी मध्य इलाकों में...इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। प्राइवेट फोरकास्टर स्काइमेट ने जून से लेकर सितंबर तक...सामान्य से कम बारिश होने की 40 फीसदी आशंका जताईहै। वहीं सूखे के आसार 25 फीसदी हैं।
प्रशांत महासागर की सतह पर असामान्य तरीके से उठती गर्म हवाओं यानी अल-नीनो के प्रभाव के चलते इस साल मानसून के दौरान भारत में सामान्य से कम बारिश होगी। जून से सितंबर के बीच कुल 896 मिलीमीटर बारिश होने के आसार हैं। अगस्त को छोड़ पूरे मानसून के दौरान इस बार सामान्य की सिर्फ 34 फीसदी बारिश होने की संभावना है। यह भविष्यवाणी मौसम संबंधी सूचना जारी करने वाली देश की पहली निजी कंपनी स्काईमेट ने की है। स्काइमेट का फोरकास्ट उन इंटरनेशनल एजेंसियों की भविष्यवाणियों से मेल खाता है,जिन्होंने इस बार गर्मी में अल नीनो के चलते बारिश पर असर पड़ने की बात कही है। स्काइमेट ने कहा कि भारत में मानसून लॉन्ग-टर्म एवरेज यानी एलपीए का 94 फीसदी रह सकता हैजिसका मतलब है कि देश में महीनों के दौरान 896 एमएम बारिश होगी। ..इससे कुछ उम्मीद बंधती है।
क्या है 'अल-नीनो' ?
अल-नीनो एक गर्म जलधारा है जो प्रशांत महासागर में पेरू तट के सहारे हर से साल बाद बहना शुरू होती है। ये समुद्र में गर्मी पैदा करती हैजिससे पेरुवियन सागर का तापमान 3.5 डिग्री सेंटीग्रेड तक बढ़ जाता है। ये दुनिया में भीषण तबाही की वजह भी बन सकती है... पिछले दिसंबर में क्रिसमस के करीब इसका पता लगने पर पेरू के मछुआरों ने इसका नामकरण अल-नीनो किया। इस जलधारा के खत्म होने के बाद.... प्रशांत महासागर में उसी जगह ठंडे पानी की धारा प्रवाहित होने लगती हैजिसे ला-नीना कहा जाता है। ला-नीना भी प्रकृति औरं मौसम में बदलाव लाती है।
 
वैज्ञानिक मानते हैं कि अल नीनो समुद्र से जुड़ी एक घटना है जो बारिश के पैटर्न को बिगाड़ देती है। ये प्रशांत महासागर से उभरती है। स्काइमेट के मुताबिक मौसम की मौजूदा स्थितियां 2012 और 1968 जैसी हैंजो अल नीनो के साल थेलेकिन तब भारत में सूखा नहीं पड़ा था। पिछले दशक में 2002, 2004 और 2009 भारत में अल नीनो की वजह से सूखे वाले साल रहे। स्काइमेट का मानना है कि अगस्त में मानसून अच्छा रह सकता है और तब सामान्य से ज्यादा बारिश होने के 70 फीसदी आसार रहेंगे।