Wednesday, 19 March 2014

सेकुलर भगदड़

नरेंद्र मोदी के पक्ष में लहर है या नहीं इस पर अनेक मत हो सकते हैं मगर इस पर कोई दो मत नहीं हो सकता कि इस चुनाव में सेकुलर भगदड़ है । सेकुलर विचारधारा के नाम पर बीजेपी का विरोध करने वाली पार्टियों की प्राथमिकता नरेंद्र मोदी को हराना नहीं है । ये सभी दल इस चुनाव में एक दूसरे को हराने में लगी हुई हैं । गणित का कोई मास्टर इस बात को एक लाइन में कह देगा । समाजवादी सेकुलर भगदड़ बराबर मोदी लहर ।


मोदी लहर है या नहीं मगर मोदी का लक्ष्य साफ़ है । कांग्रेस के साथ समाजवादी सेकुलर दलों को साफ़ कर देना । समाजवादी सेकुलर दलों का लक्ष्य भी एकदम साफ़ है । कांग्रेस को साफ़ करते हुए एक दूसरे को साफ़ कर देना । एक तरह से समाजवादी सेकुलर दल नरेंद्र मोदी की मदद करने में लगे हैं । नरेंद्र मोदी की नैतिक और रणनीतिक विजय यही है कि उन्होंने साल भर पहले से कांग्रेस पर धुआँधार हमले शुरू कर दिये थे । ये हालत कर दी कि आर जो डी को छोड़ कोई समाजवादी सेकुलर दल कांग्रेस के क़रीब जाने का साहस नहीं कर पाया । इनमें से कौन कितना सेकुलर है इस पर भी बहस है ।

बीजेपी या मोदी विरोधी मोर्चा इतना बिखर गया कि वो तब भी नहीं खड़ा हो सका जब मोदी ने आरोपी, परिवारवादी और जातिवादी नेताओं दलों को मिलाना शुरू कर दिया ।  यहाँ तक राज ठाकरे से रणनीतिक समझौता करने से शिवसेना ही ज़्यादा बौखलाई हुई है । सपा,बसपा, लोजपा, राजद, जदयू चुप हैं । लेफ़्ट की भूमिका भी साफ़ नहीं है बल्कि बेहद लचर है । कांग्रेस हटाओ और बीजेपी हराओ का नारा भ्रामक है । एक साथ दो राष्ट्रीय दलों को आप इस तरह के नारे से हरा नहीं सकते । ऐसे भ्रामक स्लोगन से आप बाज़ार में गंजी नहीं बेच सकते । कांग्रेस को हटा और बीजेपी को हराकर किसे लाओ ये कोई भी जानना चाहेगा ।

इसका नतीजा यह हुआ कि राष्ट्रीय चुनाव में ये दल बिना लक्ष्य के नज़र आने लगे । नीतीश लालू को भी हराने में लगे हैं और लालू नीतीश को भी । पासवान ये खेल छोड़ अपनी गोटी मोदी से सेट कर चुके हैं । यूपी में सपा बसपा और कांग्रेस के अलग लड़ने और कांग्रेस विरोधी लहर के कारण बीजेपी की बढ़त बताई जाने लगी है । सेकुलर भगदड़ या बिखराव बीजेपी की जीत के लिए लाल क़ालीन बिछा रहा है । जनता के सामने साफ़ नहीं है कि ये दल किस मक़सद से लड़ रहे हैं । ममता, मुलायम और मायावती तीनों पर बीजेपी को बाहर से समर्थन देने का शक किया जाता है ।

नरेंद्र मोदी जीतने के लिए लड़ रहे हैं । एक साल से घूम घूम कर रैलियाँ कर रहे हैं । इसके पीछे संसाधन, प्रचार और प्रोपेगैंडा को लेकर बहस हो रही है मगर इसमें क्या शक कि वे लगातार काम कर रहे हैं । उन जगहों पर रैलियाँ कर रहे हैं जहाँ उन्हें कोई नहीं जानता । बीजेपी के सभी मुख्यमंत्री लड़ रहे हैं । आर एस एस भी कांग्रेस के हटाने का लक्ष्य लेकर मोदी की खुल कर मदद कर रहा है । नीतीश को छोड़ विरोधी किसी ने मोदी के भाषणों को सुनकर जवाब नहीं दिया है । इलाहाबाद की रैली में मुलायम ज़रूर तैयारी करके आए थे। लालू और मायावती अभी भी पुरानी बातें कर रहे हैं । कांग्रेस के जवाब से नहीं लगता कि उनका कोई नेता मोदी के भाषण को सुनता भी है ।

इस चुनाव में जीत के बाद मेरी मोदी से एक ही अपील है कि वे इन तमाम समाजवादी सेकुलर दलों को शुक्रिया ज़रूर कहें और ज़्यादा नहीं तो एक गुलाब का फूल भिजवा दें । जिनकी वजह से जीतेंगे उनके लिए इतना तो बनता है ।