Wednesday, 19 March 2014

मोदी मतलब बीजेपी बीजेपी मतलब मोदी

क्या सचमुच बीजेपी कम सीटें आने पर नरेंद्र मोदी को पीछे कर देगी । यह चर्चा मैं तब से सुन रहा हूँ जबसे मोदी ने अपनी दावेदारी की पेशकश की । मोदी तब से अपने भाषणों में कह रहे हैं कि मुझे प्रधानमंत्री बनाओ । कभी प्रधानमंत्री के पद को सेवक कहा तो कभी चौकीदार । ग़नीमत है अगर यही बात मनमोहन सिंह ने कहीं होती तो बीजेपी या मोदी आरोप लगा रहे होते कि प्रधानमंत्री पद की गरिमा की ये हालत कर दी है कांग्रेस में । मोदी प्रधानमंत्री पद को सीईओ कहें या सेनापति कहें या मज़बूत नेतृत्व लेकिन बीजेपी के लिए प्रधानमंत्री का मतलब सिर्फ और सिर्फ मोदी हैं । 

इस चुनाव में जो भी जनता बीजेपी को वोट देगी या दे रही है वो मोदी को दे रही है । बीजेपी भी  वोट मोदी के नाम पर माँग रही है । बीजेपी के एजेंडे का कम गुजरात के काम काज का विज्ञापन ही टीवी में आ रहा है । अलग अलग राज्यों के अख़बारों में गुजरात का ही विज्ञापन छप रहा है । मोदी के भाषणों का कई भाषाओं में अनुवाद हो रहा है और डबिंग हो रही है । राजनाथ सिंह या आडवाणी के भाषणों की नहीं हो रही है । दो साल से बीजेपी का मतलब मोदी है । यह बात आर एस एस को भी मालूम है । संघ ने जानबूझ कर अनुमति दी या सत्ता के लिए बर्दाश्त किया, इस पर अटकलें लगाई जा सकती हैं । संघ के लिए भी मोदी हैं । ( अगर कहा हो तो क्योंकि खंडन हो गया है) हमारी प्राथमिकता किसे लाना है नहीं है बल्कि इस सरकार को हटाना है । सिर्फ इतना कह देने से संघ मोदी का विरोधी हो गया अजीब है । जिसने मोदी को मनोनित किया है उसकी ये बात मोदी के लिए नहीं तो किसके लिए है ।
हर हर मोदी घर घर मोदी का नारा तो कब से चल रहा है । रैलियों में मोदी मोदी का नारा लगवाया जाता है । पूर्णिया रैली में मंच पर भीमकाय फोंट में लिखा था- हर हर मोदी । हर हर गंगे और ऊँ नमो शिवा़य पर भी अब मोदी क़ायम हो चुके हैं । दिल्ली शहर में चारों तरफ़ मोदी के नए होर्डिंग लगे हैं । बड़ी सी होर्डिंग में सिर्फ मोदी का चेहरा है । नारा लिखा है अबकी बार मोदी सरकार । बीजेपी सरकार भी नहीं । मोदी सरकार । बीजेपी का चुनाव चिन्ह होर्डिंग के एक कोने में हैं । जिसके नीचे छोटे फोंट में लिखा है भाजपा को वोट दें । 


क्या आपको लगता है कि मोदी के नाम पर बीजेपी चुनाव लड़े और मोदी को ही प्रधानमंत्री न बनाए । ऐसे ख़्वाब देखने वाले नेताओं को आम आदमी पार्टी में चले जाना चाहिए या फिर ऐसी ख़बरों में यक़ीन करने वाले रिपोर्टरों को उन नेताओं के जनसंपर्क का काम संभाल लेना चाहिए जिनसे ऐसी ख़बरों की लीड मिलती हैं । आज टाइम्स आफ़ इंडिया में ख़बर छपी है कि मधु किश्वर ने ट्वीट किया है कि बीजेपी के नेता पार्टी को हरवा रहे हैं । उनका प्रयास है कि बीजेपी 160 सीटों तक सिमट जायें और मोदी की जगह राजनाथ या आडवाणी प्रधानमंत्री बन जायें । मधु ने इसे 160 क्लब का नाम दिया है । 


जिस मोदी का चयन आर एस एस ने किया है क्या उसके पास ऐसा करने का विकल्प होगा । तब क्या बीजेपी के सत्ता संघर्ष में आर एस एस एक बाॅस की जगह पार्टी नहीं बन जाएगा । बीजेपी के जो कार्यकर्ता संघ में निष्ठा रखते हैं क्या वे संघ को साज़िशकर्ता के रूप में नहीं देखेंगे । कार्यकर्ताओं को ही जो सदमा लगेगा उसकी कल्पना कोई नहीं कर सकता । फिर क्या ये बीजेपी को वोट देने वालों से छल नहीं होगा । किस मुँह से बीजेपी आगे के चुनावों में अपना प्रधानमंत्री का दावेदार लेकर जाएगी । पब्लिक और विरोधी सब कहेंगे कि असली वाला बताओ । हालाँकि ऐसा होगा नहीं पर एक पल के लिए मान लीजिये कि बीजेपी को एक सौ साठ सीटें नहीं आईं । तब क्या ये बीजेपी की जीत होगी ? क्या ये मोदी और बीजेपी की हार नहीं होगी । 2009 में बीजेपी को 112 सीटें मिली थीं । क्या 48 सीटें ज़्यादा जीतकर बीजेपी विजयी होने का दावा कर सकती है । फिर मोदी लहर का क्या होगा और अगर बीजेपी को एक सौ साठ सीटें आईं तो इसका मतलब है कि क्षेत्रीय दलों की संख्या ज़्यादा होगी । कांग्रेस भी उतनी कमज़ोर नहीं होगी । क्या ये दल सिर्फ मोदी को माइनस कर बीजेपी के किसी भी नेता के साथ आ जायेंगे । इतना आसान होता तो हर बार गठबंधन की सरकार बीजेपी की ही बनती ।

राजनीति को एक तरफ़ से नहीं देखना चाहिए । मोदी की सरकार नहीं बनेगी तो पूरी संभावना है कि बीजेपी की सरकार नहीं बनेगी । सब कुछ कुंडली देखकर तय नहीं होता । ग़ाज़ियाबाद में एक पत्रकार मित्र से पूछा कि राजनाथ की क्या स्थिति है तो उन्होंने कहा कि इस बार नब्बे हज़ार से भी ज़्यादा वोटों से जीतेंगे । ग़ाज़ियाबाद ठाकुर बहुल क्षेत्र हैं । यहाँ ठाकुरों के गाँवों की एक पूरी पट्टी है जिसे साठा चौरासी कहते हैं । जहाँ तोमर और सिसोदिया राजपूतों का वर्चस्व है । इन गाँवों में लोग मानते हैं कि इस बार मोदी की वजह से बीजेपी बड़े दल के रूप में उभरेगी और राजनाथ प्रधानमंत्री होंगे । यही राजनीति है । जिस धारणा का मज़ाक़ उड़ाने के लिए मैं यह लेख लिख रहा था और यक़ीन मानिये आख़िरी दो पैरा लिखने से पहले उस पत्रकार को फ़ोन किया तो उसकी बातों से वही आवाज़ सुनाई दी । राजनाथ इस बार ज़्यादा मतों से जीतेंगे । कमाल है । 

फिर भी मैं मानता हूँ कि अगर ऐसा हुआ तो बीजेपी टूट जाएगी । पूरे साल अकेले घूम घूम कर इतनी मेहनत करने वाले मोदी को धकियाना अब मुमकिन नहीं है । मधु किश्वर मोदी के प्रति अपनी निष्ठा के प्रदर्शन में भले ही बचकानी असुरक्षा ज़ाहिर कर रही हों मगर दम नहीं है । उन्हें मोदी सरकार में ही जगह की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए और ख़ुश रहना चाहिए कि उनके मोदी जी के साथ ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा है । टू लेट । या तो बीजेपी जीतेगी या हार जाएगी । बीजेपी के भीतर मोदी नहीं हारने वाले । पिछले एक साल में आम आदमी पार्टी के समर्थकों के अलावा मुझे एक भी ऐसा आदमी या औरत या युवा नहीं मिला है जिसने कहा हो कि वो मोदी को वोट नहीं करेगा । इन्हीं में से एक ने भी ये नहीं कहा कि वे मोदी को नहीं बीजेपी को वोट दे रहे हैं । अत: राजनीति और जीवन में सब कुछ तात्कालिक होते हुए भी औकात बोध का ध्यान रखना चाहिए । जोशी जी और टंडन जी की नाराज़गी में इतना ही दम है तो ये दोनों अपनी बगल की सीट पर बीजेपी को जीता दें । प्लीज़ अब ये वाली बकवास बंद कर दीजिये ।