Thursday, 19 December 2013

आखिर बेटियां हैं आपकी


रात 1:20 बजे, साल जाते जाते हमारे परिवार को एक और सौगात दे गया, मामा बनने के साथ ही इस साल ''मेरे घर आई दूसरी नन्हीं परी',, इसे उस मां की गोद मिली जो सबसे ज्यादा पढ़ी लिखी है, अभी कुछ दिन बाद उसे बड़की मस्टराइन कहकर चिढ़ाएंगे भी हम, अपने घर में हम ही सबसे कम पढ़े लिखे....सिर्फ स्नातक, लड़की के एक और मामा की तरफ से कुछ पंक्तियां आपके साथ साझा कर रहे हैं- छुटकी का फ़ोन आया, बहुत दिनों से बात नहीं हुई थी शायद इसीलिए, दुआ सलाम हुआ और मैंने पूछा…कैसे याद किया इस वक्त, दीवाल पर लगी घड़ी पर बात करते करते दस बजे रहे थे, छुटकी तो इस वक्त कभी फ़ोन नहीं करती आज कोई ख़ास खबर है शायद…रिजल्ट आ गया लगता है…कॉलेज में था कोई प्ले का रिहर्सल…जैसा की कॉलेज में होते रहते हैं, वो इस वक्त आ रही थी हॉस्टल वापस....उसने कहा, आधे घंटे का रास्ता है.. ट्रैफिक भी कम होता है यहां…तो आटो में बोर हो रही थी…सोचा आपसे बात कर लूं…टाइम पास हो जायेगा, यहां वहां की कुछ बातें कीं.. और बीच में गैर इरादतन बोली…भैया बहुत याद आ रही है आज आपकी…स्कूल में आप ही मुझे लेने आते थे ना, इसी मौके पर क्या कहा उसने…और क्या कह दिया छुटकी ने…उसकी आवाज की कंपकपाहट मेरी रीढ़ की हड्डी से होकर मेरे रोंगटों से बाहर निकली…और उसके बाद वो बस छुपाती रही अपना डर…अपनी खिलखिलाहट भरी शरारतों में.. मैं भी डांटता रहा उसकी शैतानियों पर.. हमेशा की तरह…उलझाये रखा उसे बातों में जब तक वो हॉस्टल ना पहुंच गई, या फिर शायद वो भी इसी कोशिश में थी, शायद क्यों…यकीनन…वार्डेन से बात कर ही ली किसी बहाने से, कोई शक कोई गुंजाइश मुझे आज सोने ना देती शायद…और मुझे नींद नहीं आई उस रात, सिर्फ एक कंपकपाती सी आवाज गूंज रही थे मेरे जेहन में …भैया बहुत याद आ रही हैं आज आपकी …स्कूल में तो आप ही मुझे लेने आते थे ना.. इसी मौके पे, छुटकी आज कितनी बड़की बात सिखा गई मुझे, मैं एक लड़का जिसके साथ कुछ होने की संभावना नगण्य पर खुदा ने मुझे किसी छुटकी से नवाजा है.. या फिर बड़की या भाभी मामी मौसी बुआ, उन चार दरिंदों के खिलाफ मैं लड़ूं या ना लड़ूं …लेकिन उस कंपकपाती हुई आवाज के लिए.. उस डर के खिलाफ जो मैंने महसूस किया…और उस नींद के लिए जो मुझे आई ही नहीं, मैं जरूर लडूंगा…क्योंकि ये मेरी लड़ाई है और आपकी भी, या फिर आप इस बात को समझने के लिए अपनी छुटकी के फ़ोन का इंतज़ार कर रहे हैं… अगर हां... तो मैं दुआ मांगूंगा खुदा से कि जो फ़ोन आपके पास आये... वो छुटकी का ही हो... किसी पुलिस स्टेशन या हॉस्पिटल का नहीं फैसला आपका…आखिर बेटियां हैं आपकी