Tuesday, 12 November 2013

अल्पसंख्यक शिक्षा की लाईफ लाइन बना मौलाना आजाद फाउंडेशन

स्वतंत्र भारत में अल्पसंख्यकों के भविष्य को देखते हुए जब अबुल कलाम मुहियुद्दीन अहमद आजाद ने शिक्षा के महत्व पर जोर दिया तो उस समय केशव बलिराम हेडगेवार और उनके सहयोगियों ने मौलाना आजाद की दूरदृष्टि का मजाक उड़ाते हुए उन्हें समय का ज्ञान न होने के साथ पक्षपाती और अदूरदर्शी करार दिया था।

आलोचनाओं की परवाह ना करते हुए मौलाना ने अल्पसंख्यकों के लिए शिक्षा को ही सबसे बेहतर बताने की वकालत जारी रखी और अपने इस सपने के साथ उन्होंने भारत के विभाजन का विरोध किया। वे अच्छी तरह से जानते थे कि मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों का भविष्य पाकिस्तान जैसे गैर धर्मनिरपेक्ष देश की धरती पर अपनी ताकत और प्रतिभा को बर्बाद करने की बजाये संयुक्त भारत में अधिक बेहतर होगा।

उनकी एकजुट रहने की पुरजोर अपीलों के बावजूद भारतीय इतिहास ने विभाजन जैसी भयावह वास्तविकता का सामना किया और मौलाना आजाद ने खुद को स्वतंत्र भारत के अल्पसंख्यकों के कल्याण कार्य में लगा दिया। बाद में, 1988 में उनकी जन्म शताब्दी के अवसर पर जब ‘मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन’ स्थापित किया गया तो इसके प्रयासों ने कुछ ही वर्षों के भीतर हेडगेवार को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया। इसकी नींव भारतीय समाज में शैक्षिक रूप से पिछड़े अल्पसंख्यकों और अन्य कमजोर वर्गों के बीच शिक्षा को समग्र रूप से बढ़ावा देने के पर टिकी थी।

आसमा इकबाल बताती हैं कि मौलाना आजाद फाउंडेशन के अंतर्गत उन्होंने कुछ साल पहले कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं का फायदा लेने के लिये दरवाजा खटखटाया तो इस फाउंडेशन ने साबित कर दिया कि यह उनकी श्क्षिा के लिये ही वरदान नहीं है बल्कि इसके जरिये वे किसी भी योग्य भारतीय अल्पसंख्यक की तरह ही बेहतर जीवन जीने के लिए आर्थिक रूप से सशक्त बनने के काबिल हुईं।

आस्मा इस संरक्षण संस्था के बारे में गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहती हैं कि ‘‘मेरी शिक्षा के लिये माता-पिता द्वारा अपनी तरफ से पूरी कोशिशों के बाद भी ऐसी स्थिति भी आई जब मुझे चिकित्सा विज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए और अधिक धन की जरुरत थी। मैंने फाउंडेशन से संपर्क किया और फिर मेरी पात्रता तथा अन्य जरुरी चीजों पर गौर करने के बाद फाउंडेशन लगभग सारे खर्चों को उठाने पर सहमत हो गया।’’

वित्तीय मदद देने के अलावा फाउंडेशन ने प्रतिस्पर्धा और बाजार की ताकतों से निपटने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया! ‘‘मैंने यह सोचा भी नहीं था कि एक फाउंउेशन इस तरह के अपेक्षित मार्गदर्शन के साथ आगे आयेगा। लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ कि इस सेटअप में कुछ पेशेवरों ने मुझे शैक्षिक सशक्तिकरण के तहत कई फायदे देने की पेशकश की। मैंने ना सिर्फ समय पर अपनी शिक्षा को पूरा किया बल्कि हैदराबाद में एक रोग अनुसंधान केंद्र में बढ़िया नौकरी भी हासिल की। आस्मा गर्व से बताती हैं।

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 12वीं योजना में अल्पसंख्यक बच्चों के आर्थिक सशक्तिकरण और बेहतर भविष्य के लिए नेतृत्व गुणों के विकास पर विशेष ध्यान देने के साथ मौलाना आजाद फाउंडेशन का कॉरपस फंड 750 करोड़ से बढ़ाकर 1500 करोड़ कर दिया। भारत के 30 करोड़ योग्य अल्पसंख्यकों - मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और पारसी - में भरोसा बढ़ाने के लिये ढेरों कल्याणकारी योजनाएं बनाई गई हैं। इस उद्देश्य को हासिल करने के लिये फाउंडेशन को अपने कोष का बड़ा हिस्सा उपभोग करने की खुली छूट दी गई है।

शैक्षिक सशक्तिकरण के तहत छात्रवृत्ति आधारित कार्यक्रमों के अलावा फाउंडेशन उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान करता हैं और इनमें उद्यमशीलता की आकांक्षाओं को बढ़ावा देने में मदद करता है। फाउंडेशन की योजनाओं से फायदा प्राप्त करने वाली एक और लाभार्थी जसप्रीत कौर के मुताबिक केंद्र सरकार अल्पसंख्यक छात्रों को शिक्षा में पूरी मदद और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए छोटे व्यवसाय/इकाईयां स्थापित करने के लिए प्रचुरता से योजनाओं को चला रही है, लेकिन दुर्भाग्य से जागरुकता की कमी इन योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में बड़ी बाधा बन रही है।

‘‘मैंने अपना व्यवसाय प्रबंधन पाठ्यक्रम पूरा करने के तुरंत बाद मैंने फाउंडेशन सहित विभिन्न वित्तीय संस्थानों से संपर्क किया। मैंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) के अधिकारियों से मुलाकात की। अपनी समस्या को हल करने के लिए मुझे सुझाव दिया गया कि सूक्ष्म वित्त विकल्प और फाउंउेशन की कुछ अन्य योजनाओं को देखूं। मैं आर्थिक सशक्तिकरण योजनाएं जैसे अन्य विकल्पों को भी ध्यान में रखे हुए था, लेकिन अंत में, मैंने काफी रियायती दर पर मिले सावधि ऋण का विकल्प चुना। इस छोटी सी शुरुआत के साथ आज मैं 2 करोड़ रुपये की बिक्री वाले ‘पैकेजिंग’ व्यवसाय को चला रही हूं।’’ जसप्रीत ने कहा।

यूपीए सरकार ने सैद्धान्तिक तौर पर अल्पसंख्यकों के आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए काफी कुछ किया है इस बात को अपने अनुभव के जरिये बताने वाली जसप्रीत ही केवल अकेली नहीं हैं। इस तरह के लाभ प्राप्त करने वाले प्रावधानों और तकनीकी प्रक्रिया का फायदा अल्पसंख्यकों तक पहुंचाने की दिशा में काफी जागरुकता फैलाने की जरुरत है।

‘‘मैंने हाल ही में मौलाना आजाद फाउंडेशन में अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए वित्तीय मदद के लिए आवेदन किया है। मुझे विश्वास है कि यह मुझे मिल जायेगा और मेरा भविष्य भी उज्जवल होगा। जहां तक मार्गदर्शन की बात है, मैं आपको बता दूं कि फाउंडेशन बहुत अच्छा काम कर रहा है। ऐसा महसूस हो रहा है कि सरकार ने अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए खजाने को खोल दिया है। दिल्ली के जाकिर हुसैन कॉलेज के छात्र सोहेल आलम ने मुस्कुराते हुए कहा।

एक तरफ सरकार ने मौलाना आजाद फाउंडेशन को प्रचुर मात्रा में शैक्षिक सशक्तिकरण योजनाओं से लैस किया है, दूसरी ओर योग्य अल्पसंख्यकों में से युवाओं में भी उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा पर जोर देने की आकांक्षा कुलाचें मार रही हैं। बस यह देखना होगा कि जागरुकता की कमी को कैसे दूर किया जायेगा।